KNEWS DESK- बिहार की राजनीति आज एक अहम मोड़ पर खड़ी है, जहां नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अपनी सरकार का बहुमत साबित करना है। 24 अप्रैल को विधानसभा में होने वाला फ्लोर टेस्ट उनकी नेतृत्व क्षमता और एनडीए गठबंधन की मजबूती की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
इस एक दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे होगी, जिसमें मुख्यमंत्री सदन के पटल पर विश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे। 15 अप्रैल को शपथ लेने के बाद यह उनकी सरकार का पहला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। खास बात यह है कि बिहार के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद पर बैठकर बहुमत साबित करने जा रहा है।
संख्या बल के लिहाज से देखें तो बिहार विधानसभा में फिलहाल 242 सदस्य हैं, क्योंकि एक सीट रिक्त है। बहुमत के लिए 122 विधायकों का समर्थन जरूरी है, जबकि एनडीए के पास करीब 201 विधायकों का आंकड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में यह फ्लोर टेस्ट औपचारिकता जैसा दिखता है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इसका महत्व बेहद बड़ा है।
गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने के लिए उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव सहित वरिष्ठ नेताओं ने सभी विधायकों को पटना में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए पूरी रणनीति पहले से तैयार कर ली गई है।
करीब दो दशकों बाद बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ है, और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे सदन में कितनी सहजता से बहुमत हासिल करते हैं और इसके बाद अपनी सरकार के अगले कदम—खासतौर पर मंत्रिमंडल विस्तार—को कैसे आगे बढ़ाते हैं।
आज का दिन न सिर्फ नई सरकार के लिए, बल्कि बिहार की राजनीति के भविष्य के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।