Knews Desk– मथुरा जिले में एक बड़े स्तर पर बायोगैस और बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस परियोजना के लिए पशुधन विभाग, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, और संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता प्रस्तावित है। इस करार की अधिकांश औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और संभावना है कि इसे मई तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
यह प्लांट गोवर्धन क्षेत्र के माधुरी कुंड स्थित लगभग 1400 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा। इस विशाल क्षेत्र में न केवल बायोगैस और बायो-सीएनजी का उत्पादन होगा, बल्कि पशुओं के लिए हरे चारे की भी खेती की जाएगी। यहां पर जई, बरसीम, लूसर्न जैसे पौष्टिक चारे उगाए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर साइलेज भी तैयार किया जाएगा, ताकि पूरे वर्ष पशुओं को पर्याप्त पोषण मिल सके।

जिले की प्रमुख गोशालाओं को इस योजना से जोड़ा जाएगा
इस परियोजना का मुख्य आधार गोबर और कृषि अवशेष होंगे, जिनका उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाएगा। इसके लिए जिले की प्रमुख गोशालाओं को इस योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध हो सके। इससे न केवल ऊर्जा का उत्पादन होगा, बल्कि गोवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी। एफएओ इस परियोजना के अंतर्गत तकनीकी सहयोग, विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की सेवाएं और संभवतः कुछ आर्थिक सहायता भी प्रदान करेगा। इसके साथ ही राज्य सरकार भी वित्तीय और नीतिगत सहयोग देगी। इस पहल के तहत “वन हेल्थ” योजना पर भी काम किया जाएगा, जिसमें पशुओं और मनुष्यों के स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना जाता है। स्वस्थ पशु बेहतर गुणवत्ता का दूध और अन्य उत्पाद देंगे, जिससे मानव स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
पशुओं में होने वाली बीमारियों पर होगी नजर
इस योजना में रोग निगरानी तंत्र स्थापित करने का भी प्रावधान है, जिससे पशुओं में होने वाली बीमारियों पर नजर रखी जा सके और समय रहते उनका उपचार किया जा सके। साथ ही, पौष्टिक आहार और बेहतर देखभाल से पशुओं की उत्पादकता बढ़ेगी। परियोजना के लागू होने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि किसानों से गोबर किस कीमत पर खरीदा जाएगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
बताया जा रहा है कि इस तरह की परियोजना पहले मथुरा में शुरू की जाएगी और इसके सफल होने के बाद इसे गोरखपुर में भी लागू किया जाएगा, जहां एक नया वेटेरिनरी कॉलेज स्थापित किया जा रहा है। कुल मिलाकर, यह योजना ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण, पशु कल्याण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।