KNEWS DESK- बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आने जा रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी पहली बार अपने दम पर मुख्यमंत्री पद संभालने जा रही है। तारापुर से विधायक सम्राट चौधरी बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और इसी के साथ राज्य की सत्ता में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना कई मायनों में खास है। अब तक बिहार में बीजेपी एनडीए गठबंधन के तहत सत्ता में भागीदार रही है, और उसके कई नेता उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद पार्टी के खाते में पहली बार जा रहा है। इस लिहाज से सम्राट चौधरी का नाम राज्य के राजनीतिक इतिहास में दर्ज हो जाएगा।
शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के दो वरिष्ठ नेताओं—विजय चौधरी और विजेंद्र यादव—के भी मंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है। दोनों नेता लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं। विजय चौधरी पहले मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष जैसे अहम पद संभाल चुके हैं, जबकि विजेंद्र यादव भी कई बार मंत्री रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं।
तीनों नेताओं की राजनीतिक यात्रा में एक दिलचस्प समानता भी देखने को मिलती है। सम्राट चौधरी ने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से की थी और बाद में विभिन्न दलों से होते हुए बीजेपी में शामिल हुए। इसी तरह विजय चौधरी ने कांग्रेस से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी, जबकि विजेंद्र यादव ने जनता दल के टिकट पर 1990 में पहली बार विधानसभा पहुंचकर राजनीति में कदम रखा था।
मंगलवार को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद एनडीए ने सम्राट चौधरी को अपना नेता चुना। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। अब बुधवार सुबह 11 बजे उन्हें बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में सम्राट चौधरी के साथ केवल दो मंत्री ही शपथ लेंगे। इसके बाद जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा और विभिन्न विभागों का बंटवारा किया जाएगा।
इस घटनाक्रम के साथ बिहार की राजनीति में न सिर्फ सत्ता का नेतृत्व बदलेगा, बल्कि आने वाले समय में नीतियों और प्रशासनिक दिशा में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है।