डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित निषाद पार्टी की महारैली उस समय सुर्खियों में आ गई, जब प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद मंच से भाषण देते हुए भावुक होकर रो पड़े। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने निषाद समाज के साथ हो रहे कथित अन्याय और उपेक्षा का मुद्दा उठाया, जिसे लेकर वे खुद को रोक नहीं सके और फूट-फूटकर रोने लगे। संजय निषाद ने कहा कि उनके समाज का हक छीना जा रहा है और वर्षों से उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों ने निषाद समाज को शिक्षा और रोजगार से दूर रखा। उन्होंने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों ने उनके समाज के लोगों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि निषाद समाज के लोगों का वोट छीनने की कोशिशें की जा रही हैं और उनकी बहन-बेटियों की सुरक्षा भी खतरे में है।
निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की उठाई मांग
रैली के दौरान उन्होंने निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में शामिल करने और आरक्षण देने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि प्रदेश की करीब 160 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, और पार्टी अब इन सीटों पर अपना प्रभाव और मजबूत करने की रणनीति बना रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर सियासत भी तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने संजय निषाद के रोने का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर करते हुए तंज कसा। उन्होंने लिखा कि ये आंसू भाजपा के साथ जाने पर “पश्चाताप” के हैं या “प्रायश्चित” के। साथ ही उन्होंने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है।
2019 में सीट बंटवारे को लेकर सपा से टूटा था गठबंधन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निषाद पार्टी का यह भावनात्मक रुख आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर भी देखा जा रहा है। गौरतलब है कि 2018 के गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में निषाद पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने बड़ा उलटफेर करते हुए भाजपा को हराया था। उस चुनाव में संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने जीत हासिल की थी। हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों का गठबंधन टूट गया और तब से निषाद पार्टी एनडीए के साथ है। गोरखपुर की इस महारैली के बाद निषाद पार्टी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए और भी रैलियां आयोजित करने की तैयारी में है। पार्टी का फोकस निषाद समाज को संगठित कर राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बनाना है। इस घटनाक्रम ने प्रदेश की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां भावनाएं, सामाजिक न्याय और राजनीतिक रणनीति एक साथ दिखाई दे रही हैं।