जदयू छोड़ केसी त्यागी ने थामा राष्ट्रीय जनता दल का दामन, बोले— जयंत चौधरी को ‘चरण सिंह’ जैसा बनते देखना चाहता हूं

डिजिटल डेस्क- जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता रहे केसी त्यागी ने आखिरकार पार्टी से अलग होने के बाद नया राजनीतिक ठिकाना चुन लिया है। उन्होंने आज जयंत चौधरी की मौजूदगी में राजद का दामन थाम लिया। पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल कराया। हाल ही में केसी त्यागी ने जदयू से इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने पार्टी के भीतर संवाद की कमी और विस्तार के अभाव को अपने फैसले की मुख्य वजह बताया था। उनके इस्तीफे के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह जल्द ही किसी अन्य दल में शामिल हो सकते हैं। आरएलडी ज्वाइन करने के बाद केसी त्यागी ने अपने इरादे साफ करते हुए कहा कि वह किसी पद या चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा लेकर पार्टी में नहीं आए हैं। उन्होंने कहा, “मैं दोनों सदनों का सदस्य रह चुका हूं, अब मैं सांसद या विधायक बनने नहीं आया हूं। मैं जयंत चौधरी को चौधरी चरण सिंह जैसा बनते देखना चाहता हूं।

आरएलडी किसानों और मुसलमानों की पार्टी- केसी त्यागी

त्यागी ने आगे कहा कि वह चाहते हैं कि भविष्य में ऐसा समय आए, जब जयंत चौधरी के हाथों देश में प्रधानमंत्री का मनोनयन हो, जैसा कि चौधरी चरण सिंह के समय में मोरारजी देसाई के साथ हुआ था। उन्होंने आरएलडी को किसानों और मुसलमानों की पार्टी बताते हुए कहा कि आजाद भारत में उत्तर प्रदेश में जितने मुस्लिम सांसद चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में बने, उतने किसी और दल ने नहीं बनाए। उन्होंने कहा कि वह अपने अनुभव और राजनीतिक जीवन के बचे हुए समय को जयंत चौधरी को मजबूत करने में लगाएंगे। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी केसी त्यागी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि 2027 तक आरएलडी इतनी मजबूत हो जाए कि मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने में उसकी निर्णायक भूमिका हो।

1989 में पहली बार संसद पहुंचे थे केसी त्यागी

गौरतलब है कि जेडीयू छोड़ने के बाद ही आरएलडी की ओर से केसी त्यागी को पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया गया था। इसके बाद से ही उनके आरएलडी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं, जो अब सच साबित हो गई हैं। केसी त्यागी, जिनका पूरा नाम किशन चंद त्यागी है, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति में कदम रखा और करीब पांच दशकों के लंबे राजनीतिक करियर में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वह 1989 में हापुड़ लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने गए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *