डिजिटल डेस्क- मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच हाल ही में बढ़े तनाव के बीच दुनिया भर के कई देशों को तेल और गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं रहा। इसके मद्देनजर भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की। इसका परिणाम यह हुआ कि अमेरिका के टेक्सास से रवाना एलपीजी कार्गो शिप “पाइक्विसस पायनियर” कल रविवार सुबह मंगलुरु के न्यू मंगलौर पोर्ट पर पहुंच चुका है। इस कदम से घरेलू गैस आपूर्ति में राहत मिलने की संभावना है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब चौथे चरण में प्रवेश कर चुका है। फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। अमेरिकी और इजरायली हमलों का ईरान लगातार जवाब दे रहा है। इसी कड़ी में ईरान ने इजरायल के अराद (Arad) और डिमोना (Dimona) को मिसाइलों से निशाना बनाया, जिससे 100 से अधिक लोग घायल हुए। इस संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल आपूर्ति को भी प्रभावित किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया साइट पर जारी की चेतावनी
इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने सहयोगी देशों से जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया, लेकिन कोई भी देश सामने नहीं आया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर चेतावनी दी है कि अगर ईरान 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से नहीं खोलेगा, तो अमेरिका उसके विभिन्न पावर प्लांट्स पर हमला करेगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो गई है और उसके पास प्रभावी नौसेना, वायुसेना और मजबूत विमानरोधी प्रणाली नहीं बची है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि ईरान के कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं, जिससे अमेरिकी अभियान अपने लक्ष्यों के करीब पहुंच चुका है।वहीं, ईरान की ओर से शांति कायम करने के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मिडिल ईस्ट में बिना किसी विदेशी हस्तक्षेप के शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ एक सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने युद्ध रोकने की शर्तें भी दोहराईं, जिसमें प्रमुख रूप से अमेरिका और इजरायल से हमले तुरंत रोकने और भविष्य में ऐसे हमलों की गारंटी देने की मांग शामिल है।
चुनौतीपूर्ण समय में गैस आपूर्ति से मिलेगी बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सुरक्षा और तेल आपूर्ति का मामला न केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद संवेदनशील है। भारत जैसे तेल और गैस आयातक देशों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है। अमेरिकी एलपीजी की आपूर्ति से भारत को अल्पकालिक राहत मिलेगी, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए मिडिल ईस्ट में स्थिरता और रणनीतिक सहयोग आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों की नजरें अब मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई हैं। यह देखना बाकी है कि ईरान की शर्तों पर अमेरिका और इजरायल किस हद तक विचार करते हैं और तनाव को कम करने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं। भारत के लिए एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित होना एक राहत भरा कदम है, लेकिन वैश्विक तेल और गैस बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्कता बरतना अनिवार्य है।