KNEWS DESK- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में विदा हो रहे सांसदों को संबोधित करते हुए उनके योगदान की सराहना की। अपने भावुक भाषण में उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका संसदीय अनुभव और समर्पण नए सदस्यों के लिए प्रेरणा है।
पीएम मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे, एच. डी. देवेगौड़ा और शरद पवार जैसे नेताओं का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संसदीय कार्यप्रणाली को समर्पित किया है और यह कोई छोटी बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि इतने लंबे अनुभव के बावजूद इन नेताओं की सदन में सक्रिय उपस्थिति और निष्ठा सभी के लिए सीखने योग्य है। “हम सभी को इनसे यह सीखना चाहिए कि किस तरह पूरी प्रतिबद्धता के साथ संसद में भाग लेना है,” उन्होंने कहा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि संसद में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के दौरान कई बार मतभेद और तीखे पल भी आते हैं, लेकिन विदाई जैसे अवसरों पर सभी दलीय सीमाओं से ऊपर उठ जाते हैं। ऐसे समय में आपसी सम्मान और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने आगे कहा कि जो सदस्य विदा हो रहे हैं, उनमें से कुछ दोबारा लौटने की उम्मीद के साथ जा रहे हैं, जबकि कुछ अपने अनुभवों को समाज और सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ाने के लिए ले जा रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, “राजनीति में कोई पूर्ण विराम नहीं होता,” और यह सार्वजनिक जीवन की निरंतरता को दर्शाता है।
इस दौरान राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो लोग राजनीति और सार्वजनिक जीवन में होते हैं, वे कभी थकते नहीं और न ही रिटायर होते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य देश सेवा होता है।
खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के साथ अपने लंबे संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वे देवेगौड़ा जी को 50 साल से अधिक समय से जानते हैं और उनके साथ काम भी किया है।
राज्यसभा का यह सत्र भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा, जहां विभिन्न दलों के नेताओं ने एक-दूसरे के योगदान को सम्मान दिया और लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने का संदेश दिया।