Knews Desk– उत्तर प्रदेश की Yogi Adityanath सरकार ने पशु चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई कर रहे छात्रों को बड़ी राहत दी है। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पशु चिकित्सा छात्रों के इंटर्नशिप स्टाइपेंड को तीन गुना बढ़ाने का फैसला लिया गया। इस फैसले के बाद अब छात्रों को 4 हजार रुपये की जगह 12 हजार रुपये प्रतिमाह इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा।
300 से ज्यादा छात्रों को मिलेगा फायदा
सरकार के इस फैसले से प्रदेश के तीन प्रमुख पशु चिकित्सा संस्थानों में पढ़ाई कर रहे 300 से अधिक छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। इनमें उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय शामिल हैं।
पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर
उत्तर प्रदेश के दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री Dharampal Singh ने कहा कि प्रदेश में पशुधन की संख्या काफी ज्यादा है और राज्य की अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पशु चिकित्सकों की जिम्मेदारी और महत्व दोनों बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि पशुओं की बीमारियों की रोकथाम, स्वास्थ्य सेवाओं और बेहतर नस्ल विकास के लिए प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
दूसरे राज्यों के मॉडल का किया गया अध्ययन
सरकार के मुताबिक यह फैसला हरियाणा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में दिए जा रहे इंटर्नशिप भत्ते का अध्ययन करने के बाद लिया गया है। यूपी सरकार का मानना है कि बढ़ा हुआ स्टाइपेंड छात्रों को आर्थिक सहारा देगा और उनकी पढ़ाई व प्रशिक्षण के प्रति उत्साह बढ़ाएगा।
सरकार पर बढ़ेगा अतिरिक्त आर्थिक भार
कैबिनेट के फैसले के अनुसार इंटर्नशिप भत्ता बढ़ने से सरकार पर लगभग 4.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार आएगा। यह राशि विश्वविद्यालयों को मिलने वाले गैर-वेतन अनुदान से दी जाएगी। सरकार का कहना है कि यह निवेश पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
छात्रों में खुशी का माहौल
सरकार के फैसले के बाद पशु चिकित्सा छात्रों में खुशी देखी जा रही है। लंबे समय से छात्र इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे थे। कई राज्यों में अधिक स्टाइपेंड मिलने के कारण यूपी के छात्र खुद को पीछे महसूस कर रहे थे। अब सरकार के इस फैसले को छात्रों के मनोबल और भविष्य दोनों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।