Knews Desk- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और परमाणु विवाद के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका को 14 सूत्रीय न्यूक्लियर और शांति समझौते का प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस समझौते के जरिए युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलना चाहता है।
क्या है ईरान का 14 पॉइंट प्लान?
ईरान के प्रस्ताव में कई बड़े मुद्दों को शामिल किया गया है। इसमें पूरे क्षेत्र में युद्ध खत्म करने, Strait of Hormuz को दोबारा खोलने, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने और जमे हुए ईरानी फंड जारी करने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में हमले न करने की गारंटी भी मांगी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने यह भी कहा है कि अगर उसकी शर्तें मानी जाती हैं, तो वह परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता दोहरा सकता है। हालांकि तेहरान ने साफ किया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने को तैयार नहीं है।
अमेरिका की क्या हैं शर्तें?
अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त अंतरराष्ट्रीय निगरानी स्वीकार करे। इसके साथ ही वॉशिंगटन ने मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों को समर्थन रोकने की भी मांग रखी है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के प्रस्ताव को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि “घड़ी तेजी से चल रही है” और अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
क्यों अहम है यह प्रस्ताव?
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और वैश्विक तेल बाजार दबाव में है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से तेल सप्लाई पर निर्भर है। अगर समझौता नहीं हुआ तो तेल संकट और महंगाई बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता से जुड़ी हुई है। हालांकि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।