KNEWS DESK- शेखपुरा जिले के फतेहपुर गांव के रहने वाले रंजीत कुमार ने खुद को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में 440वीं रैंक हासिल करने वाला उम्मीदवार बताकर पूरे इलाके में वाहवाही और सम्मान बटोरा। युवाओं को प्रेरित करने वाले भाषण देकर खुद को एक आदर्श उदाहरण पेश करने वाला रंजीत, असल में झूठ बोल रहा था।
रंजीत ने दावा किया कि वह UPSC में 440वीं रैंक हासिल कर चुका है। जैसे ही यह खबर गांव और आसपास के इलाकों में फैली, लोग उसे बधाई देने पहुंचे। विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, माला पहनाई गई और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और पूर्व विधायक भी उसके सम्मान में मौजूद रहे। रंजीत ने कार्यक्रमों में युवाओं को मोटिवेशनल स्पीच देते हुए कहा कि “जब लक्ष्य तुम्हें दिखाई पड़ रहा है, तो मंजिल आसान हो जाएगी।”
सच्चाई तब सामने आई जब कुछ लोग यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर रिजल्ट चेक करने पहुंचे। 440वीं रैंक असली में कर्नाटक के एक उम्मीदवार का था। इस खुलासे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और रंजीत गायब हो गया। उसका मोबाइल बंद है और फिलहाल उसका कोई पता नहीं चल पा रहा है।
माहुली थाना के अधिकारियों ने भी रंजीत को मान्यता दे दी थी और उसके UPSC चयन की पुष्टि की। लेकिन असली दस्तावेजों की जांच में झूठ सामने आने के बाद पुलिस भी उसके पीछे पड़ गई।
UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में झूठा दावा करने के मामले बिहार और यूपी में पहले भी सामने आ चुके हैं। उदाहरण के लिए, बिहार की आकांक्षा सिंह और यूपी की शिखा ने भी अपने चयन का झूठा दावा किया था, जिससे प्रशासन को सक्रिय रूप से तथ्य स्पष्ट करने की जरूरत पड़ी थी।
फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद रंजीत के दिल्ली भागने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोग और प्रशासन उसकी तलाश में जुटे हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि UPSC जैसी परीक्षा में झूठा दावा करना कितनी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।