कांग्रेस की रणनीति: मायावती के वोटबैंक में सेंध लगाने की तैयारी

K News Desktop- उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने कांशीराम के जन्मदिन के अवसर पर एक हफ्ते तक सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों का आयोजन करने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम की शुरुआत 13 मार्च को लखनऊ के जुपिटर हाल, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से होगी। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लेंगे। कांग्रेस ने इस वर्ष कांशीराम की जयंती को सामाजिक परिवर्तन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

इस कार्यक्रम में दलित-पिछड़े चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी न्योता दिया गया है। यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राहुल गांधी के इस कदम को खासकर दलित वोटबैंक को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस का मानना है कि कांशीराम की विरासत संभाल रहीं बसपा सुप्रीमो मायावती लंबे समय से सक्रिय नहीं हैं और बीजेपी की बी टीम की तरह काम कर रही हैं। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि कांशीराम के बड़े वोटबैंक को अपने पाले में किया जा सकता है।

राहुल गांधी ने लगातार यह संदेश दिया है कि “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” और जातिगत जनगणना की मांग भी उन्होंने उठाई है। इससे कांशीराम समर्थक कांग्रेस की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इससे पहले राहुल ने लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने के मुद्दे को उठाकर बीजेपी के खिलाफ खेल को अपने पक्ष में किया था।

कांशीराम ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी और उन्हें उत्तर प्रदेश तथा देश के अन्य हिस्सों में दलित और पिछड़े समुदायों को एक मजबूत राजनीतिक समूह में संगठित करने का श्रेय दिया जाता है। उनकी जयंती हर साल उनके फॉलोअर्स और खासकर बसपा द्वारा मनाई जाती है।

स साल समाजवादी पार्टी ने भी ऐलान किया है कि वह इस दिन को बड़े पैमाने पर मनाएगी और इसे PDA दिवस के रूप में मनाएगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की आलोचना की और इसे राजनीतिक ड्रामा करार दिया। उनका कहना है कि SP का यह कदम बहुजन समाज और कांशीराम जैसे आइकॉन के प्रति हमेशा से असम्मानपूर्ण रहा है।

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