LPG संकट का असर, ₹10 वाली चाय अब 20 में, मटर-पनीर और गोलगप्पे भी महंगे, महंगाई बढ़ी

KNEWS DESK- मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। खासतौर पर LPG (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) की कमी ने रोजमर्रा की जिंदगी और व्यवसायों को हिला दिया है। तेल-गैस आयात में रुकावट के कारण गैस कंपनियों ने LPG की कीमतें बढ़ा दी हैं, वहीं कमर्शियल सिलेंडर पर रोक ने छोटे दुकानदारों और बड़े रेस्टोरेंट-होटलों में हड़कंप मचा दिया है।

नोएडा और दिल्ली के रेहड़ी-खोमचों के अनुसार, जो चाय कल तक 10 रुपये में मिलती थी, अब वही एक कप चाय 15-20 रुपये में बिक रही है। पूरी-सब्जी की प्लेट और गोलगप्पे जैसी रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो गई हैं। कई रेस्तरां और ढाबों ने अपने मेन्यू बदल दिए हैं, थाली में मिलने वाले आइटमों में कटौती की गई है और कुछ ने इलेक्ट्रिक इंडक्शन और तंदूर का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट में तेल-गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। भारत अपनी घरेलू एलपीजी जरूरत का लगभग 60% आयात करता है, और इन आयात का 85-90% होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर पर रोक ने छोटे और बड़े व्यवसायों में समस्या बढ़ा दी है।

नोएडा के सेक्टर 16 में एक दुकानदार ने बताया कि 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर अब 2500-2800 रुपये तक बिक रहे हैं, और सिलेंडर के लिए बोलियां लग रही हैं। यही कारण है कि छोटे कारोबारियों को गैस न मिलने पर अपनी दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं।

छोटे दुकानदारों के अलावा बड़े होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायियों की चिंता भी बढ़ी है। कई रेस्तरां ने अपने मेन्यू में बदलाव कर थाली में परोसे जाने वाले आइटम घटा दिए हैं। दाल, रोटी, सब्जी और मटर-पनीर जैसी चीजें अब कम मात्रा में दी जा रही हैं, जबकि थाली की कीमत में वृद्धि हुई है।

मुंबई होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि LPG आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो देश के लगभग 50% होटल और रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने इस संकट को देखते हुए OMCs के तीन कार्यकारी निदेशकों वाली समिति का गठन किया है, लेकिन नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने कहा कि जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है।

जमीनी स्तर पर देखा जाए तो एलपीजी संकट का असर हर घर और व्यवसाय में दिखाई दे रहा है। चाय-नाश्ते के कारोबारी, छोटे ढाबे और बड़े होटल—सभी को गैस सिलेंडर की भारी कमी और बढ़ती कीमतों के कारण मजबूरी में बदलाव करने पड़ रहे हैं।

इस संकट से न केवल रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ महंगे हुए हैं, बल्कि व्यवसायों के संचालन पर भी गंभीर असर पड़ा है। जनता और कारोबारी अब एलपीजी संकट के जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

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