स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा आज, ओम बिरला नहीं संभालेंगे सदन की कार्यवाही

k Newsdesk Top- लोकसभा में आज एक असामान्य लेकिन संवैधानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थिति देखने को मिल सकती है। स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वह सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, जब स्पीकर को पद से हटाने से जुड़ा प्रस्ताव सदन में विचार के लिए आता है, तो उस दौरान स्पीकर खुद अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठ सकते।

हालांकि ओम बिरला सदन में मौजूद रहेंगे, लेकिन अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने की बजाय अग्रिम पंक्ति में एक सामान्य सांसद की तरह बैठकर अपने खिलाफ चल रही बहस को सुनेंगे। इस दौरान उन्हें अपने बचाव में बोलने का अधिकार भी होगा और यदि मतदान की स्थिति आती है तो वह एक साधारण सांसद की तरह उसमें हिस्सा भी ले सकते हैं।

दरअसल, विपक्ष की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव में ओम बिरला को स्पीकर पद से हटाने की मांग की गई है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान उन्होंने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया। इसी वजह से संसद का सियासी माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सदन में इस प्रस्ताव पर बहस किस दिशा में जाती है।

संविधान के प्रावधानों के मुताबिक, जब स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव चर्चा के लिए आता है, तो उस दौरान सदन की कार्यवाही की जिम्मेदारी किसी अन्य सदस्य को सौंपी जाती है। यही कारण है कि इस बहस के दौरान ओम बिरला अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे और सदन की कार्यवाही का संचालन पीठासीन सदस्य करेंगे।

इसी बीच इस मुद्दे को लेकर सदन में हंगामा भी देखने को मिला। पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल ने विपक्षी दलों से कहा कि अगर उन्होंने प्रस्ताव लाया है, तो उस पर गंभीरता के साथ चर्चा भी करनी चाहिए।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि इस प्रस्ताव पर होने वाली बहस और उसके संभावित परिणाम क्या होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बहस का असर न सिर्फ संसद की कार्यवाही पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले दिनों में देश की राजनीति के माहौल को भी प्रभावित कर सकता है।

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