राष्ट्रपति के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल विवाद, केंद्र ने बंगाल सरकार से मांगी रिपोर्ट

K News Desktop- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर केंद्र सरकार ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है—भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इसे राष्ट्रपति का अपमान बता रही है, जबकि टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई प्रोटोकॉल नहीं टूटा।

केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सिलीगुड़ी में हुई उस घटना पर नाराजगी जताई, जिसमें राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगे। पत्र में पूछा गया है कि प्रोटोकॉल के मानकों का उल्लंघन कैसे और किस कारण से हुआ, कार्यक्रम का स्थान अचानक क्यों बदला गया और इसके पीछे क्या वजह रही। केंद्र ने इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट आज शाम 5 बजे तक भेजने को कहा है।

दरअसल, 7 मार्च 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दार्जिलिंग ज़िला के सिलीगुड़ी में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया था। यह कार्यक्रम आदिवासी समुदाय से जुड़ा था और मूल रूप से इसे बिधाननगर में आयोजित किया जाना था, जहां बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना थी। हालांकि राज्य प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ जैसे कारणों का हवाला देकर वहां अनुमति नहीं दी, जिसके बाद कार्यक्रम को गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया।

बीजेपी ने इस पूरे मामले को राज्य सरकार की साजिश बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रपति के आगमन पर न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही राज्य सरकार का कोई मंत्री स्वागत के लिए मौजूद था, जबकि प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री या मंत्री का उपस्थित रहना अपेक्षित माना जाता है।

बताया जाता है कि कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने भी आश्चर्य जताते हुए ममता बनर्जी को “छोटी बहन” कहकर पूछा कि क्या वे उनसे नाराज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद बंगाल की बेटी हैं, फिर भी कार्यक्रम के स्थान को लेकर उन्हें अनुमति नहीं मिली।

राष्ट्रपति के दौरे के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेताओं ने इसे “शर्मनाक” बताते हुए राष्ट्रपति का अपमान करार दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टीएमसी सरकार ने हदें पार कर दी हैं और यह लोकतंत्र तथा आदिवासी सशक्तिकरण में विश्वास रखने वालों के लिए दुखद है।

वहीं टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम निजी संगठन अंतरराष्ट्रीय संथाल परिषद का था, इसलिए प्रोटोकॉल के तहत मुख्यमंत्री की मौजूदगी अनिवार्य नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति राजनीतिक एजेंडे के तहत बयान दे रही हैं और राज्य सरकार ने आदिवासी समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए हैं। टीएमसी का दावा है कि इस कार्यक्रम में किसी भी तरह का प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ।

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