KNEWS DESK- हिंदू धर्म में रंग पंचमी का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन रंगों के साथ उत्सव मनाने की परंपरा है और इसे होली उत्सव का अंतिम चरण भी माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता स्वयं पृथ्वी पर आकर भक्तों के साथ रंगों का उत्सव मनाते हैं। इस कारण इसे देवताओं को समर्पित पर्व माना जाता है और कई जगह इसे देव पंचमी या श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से श्रीकृष्ण, राधा रानी और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
रंग पंचमी 2026 की तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार:
- पंचमी तिथि की शुरुआत: 07 मार्च 2026, शाम 7:17 बजे
- पंचमी तिथि का समापन: 08 मार्च 2026, रात 9:10 बजे
ऐसे में साल 2026 में रंग पंचमी का पर्व 08 मार्च 2026 को धूमधाम से मनाया जाएगा।
रंग पंचमी 2026 पूजा विधि
रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा के लिए एक लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
- उस पर राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- पास में एक कलश स्थापित करें और उस पर स्वास्तिक बनाकर जल भरें।
- भगवान को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं।
- इसके बाद नए वस्त्र, फूल और माला से उनका श्रृंगार करें।
- गुलाल, चंदन, अक्षत और मिठाई का भोग लगाएं।
- घी का दीपक और धूप जलाकर मंत्र, चालीसा और कथा का पाठ करें।
- अंत में श्रद्धा के साथ भगवान की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।
रंग पंचमी पर करें इन मंत्रों का जाप
- ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
- ॐ श्री कृष्णाय नमः
राधा-कृष्ण मंत्र:
“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवते राधाप्रियाय राधारमणाय गोपीजनवल्लभाय ममाभीष्टं पूरय पूरय हुं फट् स्वाहा”
प्रार्थना मंत्र:
“देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते! देहिमे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः”
लक्ष्मी नारायण मंत्र:
“ॐ श्री लक्ष्मी-नारायणाय नमः”
रंग पंचमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंग पंचमी को होली उत्सव का समापन माना जाता है। इस दिन रंगों के माध्यम से प्रकृति के पंचतत्वों को जागृत और संतुलित करने की परंपरा भी बताई जाती है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन रंग खेलने और पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मकता का प्रभाव कम हो जाता है। साथ ही भक्तों को सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
रंग पंचमी पर करें कुंज बिहारी की आरती
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
कुंजबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
मोर मुकुट प्रभु शीश पे सोहे,
प्यारी बंशी मेरो मन मोहे।
देखि छवि बलिहारी जाऊँ,
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी,
जिसने सारी दुनिया तारी।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ,
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
दास अनाथ के नाथ आप हो,
दुःख-सुख जीवन प्यारे साथ हो।
हरि चरणों में शीश नवाऊँ,
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
श्री हरि दास के प्यारे तुम हो,
मेरे मोहन जीवन धन हो।
देखि युगल छवि बलि-बलि जाऊँ,
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
आरती गाऊँ प्यारे तुमको रिझाऊँ,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ।
श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ,
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥