K News Desktop- वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब एविएशन सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और एयर रूट्स में बदलाव की वजह से एयरलाइंस की ऑपरेशनल लागत तेजी से बढ़ रही है। इसी स्थिति को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने शुक्रवार को एयरलाइन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और मौजूदा हालात पर चर्चा की।
बैठक में एयरलाइन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि अगर वेस्ट एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका एयरलाइन ऑपरेशंस पर गंभीर असर पड़ सकता है। एयरलाइंस ने सरकार से जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर राहत देने की मांग भी की है, क्योंकि जेट फ्यूल आमतौर पर एयरलाइंस की कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का 15 से 25 प्रतिशत तक होता है।
दरअसल, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर जेट फ्यूल पर पड़ रहा है। फ्यूचर सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच सिंगापुर में जेट फ्यूल की कीमतें 72 प्रतिशत तक बढ़कर रिकॉर्ड 225.44 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इससे एयरलाइन कंपनियों की लागत में भारी इजाफा होने की आशंका है।
रूट में बदलाव भी एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। वेस्ट एशिया के कई इलाकों में तनाव के कारण एयरलाइंस को लंबे और वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे फ्यूल खर्च बढ़ रहा है और उड़ानों का समय भी ज्यादा हो रहा है। उदाहरण के तौर पर एयर इंडिया को यूरोप और नॉर्थ अमेरिका की उड़ानों के लिए लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है, जिससे उसकी लागत पहले ही बढ़ चुकी है।
वहीं इंडिगो भी प्रभावित हुई है। कंपनी ने यूरोप के लिए उड़ानें शुरू करने के उद्देश्य से छह वाइड-बॉडी विमान लीज़ पर लिए थे, लेकिन विमान मालिक नॉर्स अटलांटिक यूरोपीय एविएशन रेगुलेटर EASA के नियमों के कारण इन विमानों को वेस्ट एशिया के एयरस्पेस में उड़ान भरने की अनुमति नहीं दे पा रही है।
भारतीय एयरलाइंस के सामने एक और बड़ी चुनौती यह है कि यूरोप और एशिया के बीच उड़ानों के लिए वेस्ट एशिया ही अब एक प्रमुख ट्रांजिट रूट बचा है। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय एयरलाइंस को पाकिस्तान के एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है, जिससे विकल्प और सीमित हो गए हैं।
इसके अलावा बीमा कंपनियों ने भी वॉर रिस्क इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ाना शुरू कर दिया है। दिल्ली-दुबई जैसे रूट पर नैरो-बॉडी विमान के लिए लगभग 30 से 40 लाख रुपये और वाइड-बॉडी विमान के लिए 90 लाख से 1 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है।
एयरलाइंस ने सरकार से एयरपोर्ट फीस और रूट नेविगेशन चार्ज को कम करने की मांग भी की है, जिन्हें एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) द्वारा लगाया जाता है। हालांकि सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फिलहाल एविएशन सेक्टर के लिए किसी वित्तीय राहत पैकेज पर विचार से इनकार किया है, लेकिन यह जरूर कहा है कि वेस्ट एशिया में उड़ान भरने वाली भारतीय एयरलाइंस के सामने आने वाली नियामकीय चुनौतियों को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच, वेस्ट एशिया में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए सीमित उड़ानें चलाई जा रही हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक घरेलू एयरलाइंस ने शुक्रवार को 278 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कीं, जबकि वेस्ट एशिया से आने-जाने वाली 96 उड़ानों को ही शेड्यूल किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती है, तो इसका सबसे ज्यादा असर उन भारतीय एयरलाइंस पर पड़ेगा जिनकी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और वेस्ट एशिया के रूट पर निर्भरता ज्यादा है।