भारत आएगा रूस का नया PD-8 जेट इंजन, पुतिन के दौरे में एविएशन डील पर नजर

Knews Desk– रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत के दौरे पर आ रहे हैं। उनके दिल्ली दौरे को दोनों देशों के बीच रक्षा और विमानन सहयोग के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों और तकनीकी सहयोग पर बातचीत हो सकती है। इसी बीच रूस भारत में अपनी नई पीढ़ी के PD-8 जेट इंजन को प्रदर्शित करने की तैयारी कर रहा है। यह इंजन रूस के SJ-100 रीजनल एयरलाइनर को ताकत देता है और भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SJ-100 के निर्माण को लेकर पहले ही दोनों देशों के बीच समझौता हो चुका है।

रूसी सरकारी डिफेंस और इंडस्ट्रियल कंपनी Rostec की सब्सिडियरी United Engine Corporation ने PD-8 इंजन को विकसित किया है। इसे SJ-100 और Be-200 जैसे रूसी विमानों के लिए तैयार किया गया है। PD-8 इंजन को 9 से 11 सितंबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले INNOPROM India में प्रदर्शित किया जाएगा। रूस के लिए यह आयोजन अपने विमानन और औद्योगिक तकनीक को भारतीय बाजार के सामने पेश करने का एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

PD-8 इंजन की तकनीकी क्षमता भी इसे खास बनाती है। इसका ड्राई वेट करीब 1.7 टन बताया गया है, जबकि नैसेल के साथ इसका वजन लगभग 2.3 टन है। इसका बाईपास रेशियो 4.4 है और यह करीब 8 टन का टेकऑफ थ्रस्ट पैदा करने में सक्षम है। रूस इसे अपनी नई पीढ़ी की विमानन तकनीक के तौर पर पेश कर रहा है। इस इंजन का इस्तेमाल SJ-100 रीजनल एयरलाइनर में किया जाता है, जिसमें 75 से 103 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। विमान करीब 3,530 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है और इसकी क्रूज स्पीड Mach 0.82 यानी लगभग 1,013 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है।भारत और रूस के बीच SJ-100 को लेकर पहले ही अहम समझौता हो चुका है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने अक्टूबर 2025 में भारत में SJ-100 सिविल कम्यूटर एयरक्राफ्ट के निर्माण के लिए रूस की United Aircraft Corporation के साथ करार किया था। इस समझौते को भारत के सिविल एविएशन सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि SJ-100 कम दूरी की कनेक्टिविटी के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है और यह विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

UAC के प्रमुख वादिम बादेखा ने जून 2026 में बताया था कि भारत ने रूसी विमानन उपकरणों में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। उनके मुताबिक भारत में SJ-100 और Il-114-300 विमानों को लेकर चर्चा हुई है और करीब 100 से 200 विमानों की संभावित मांग पर बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि भारत में SJ-100 का उत्पादन अगले तीन साल के भीतर शुरू हो सकता है। इससे देश में क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क मजबूत होने के साथ विमान निर्माण और सप्लाई चेन से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।पुतिन के भारत दौरे के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़ी बातचीत भी अहम रहने वाली है। रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर भारत के साथ चर्चा कर रहा है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि Su-57 की बिक्री पुतिन के भारत दौरे के एजेंडे में शामिल है। इसके साथ ही Su-57 से जुड़ी तकनीक साझा करने की संभावनाओं पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। ऐसे में PD-8 इंजन की प्रदर्शनी से लेकर SJ-100 के भारत में निर्माण और Su-57 पर चर्चा तक, पुतिन का यह दौरा भारत-रूस विमानन और रक्षा सहयोग के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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