‘PoK भारत का अभिन्न हिस्सा, उसकी वापसी पर ही होगी पाकिस्तान से बात’ : कारगिल विजय दिवस पर राजनाथ सिंह

द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर रक्षा मंत्री ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। पाकिस्तान पर आतंकवाद को सरकारी नीति बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय सेना हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।

Knews Desk- कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को लेकर भारत का स्पष्ट रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भारत को वापस नहीं मिलता, तब तक पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दोहराया कि पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा है और उस पर अवैध कब्जा किया गया है।

द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना और उसके संरक्षण में काम करने वाले आतंकी संगठनों के बीच कोई अंतर नहीं रह गया है। भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देने वाली हर कोशिश का भारतीय सशस्त्र बल पूरी ताकत के साथ जवाब देंगे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से आतंकवादियों और उनके मददगारों को कड़ा संदेश दिया है। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम है।

कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि 1999 का कारगिल युद्ध केवल सैन्य जीत नहीं था, बल्कि यह भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध स्मारक पर अंकित शहीदों के नाम देश के हर क्षेत्र, धर्म और समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भारत की एकता और अखंडता की मिसाल हैं।

राजनाथ सिंह ने भारत और पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि आज भारत नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर निर्माण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं पाकिस्तान आज भी आतंकवाद, कट्टरपंथ, प्रॉक्सी वॉर और सीमा पार घुसपैठ जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने में लगा हुआ है।

उन्होंने कारगिल युद्ध में शहीद हुए उन जवानों को भी याद किया, जिनमें कई की उम्र महज 20 से 25 वर्ष के बीच थी। उन्होंने कहा कि इन वीर सपूतों ने अपने सपनों से पहले देश को चुना और मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका यह त्याग हमेशा देशवासियों को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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