परिसीमन विधेयक को लेकर डीएमके के रुख पर नजर, दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी ने जताई चिंता
Knews Desk- संसद के मॉनसून सत्र से पहले केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि आगामी सत्र में 8 विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े संभावित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।
महिला आरक्षण कानून और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। इसके लिए एनडीए सरकार विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। इस बीच डीएमके जैसे दलों के रुख को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
परिसीमन मुद्दे पर डीएमके ने उठाए सवाल
डीएमके नेताओं ने संकेत दिए हैं कि अगर परिसीमन प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है तो पार्टी इसका विरोध करेगी। डीएमके संसदीय दल के नेता टीआर बालू ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि महिला आरक्षण कानून को मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या के आधार पर भी लागू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार परिसीमन विधेयक को लेकर क्या प्रस्ताव लाने जा रही है, इसकी अभी पूरी जानकारी विपक्ष के पास नहीं है।
‘दक्षिणी राज्यों के हितों से समझौता नहीं’
डीएमके के राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि अगर नए परिसीमन मॉडल से दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित होते हैं तो उनकी पार्टी संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों को डर है कि नए परिसीमन के बाद लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। डीएमके का कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, उन्हें इसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
सरकार बोली- अभी एजेंडे में 8 विधेयक
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सर्वदलीय बैठक के बाद बताया कि सरकार ने मॉनसून सत्र के लिए 8 विधेयकों की जानकारी दी है, जिनमें 5 नए बिल शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार संसद में कामकाज चाहती है और विपक्ष को भी सदन चलाने में सहयोग करना चाहिए। रिजिजू ने कहा कि अगर भविष्य में कोई नया विधेयक लाया जाता है तो उसकी जानकारी बिजनेस एडवाइजरी कमेटी को दी जाएगी।
मॉनसून सत्र में गरमा सकता है परिसीमन मुद्दा
परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक आगामी संसद सत्र के सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। सरकार इन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश में है, जबकि विपक्षी