भारत की आबादी कब पहुंचेगी चरम पर? 64 देश पार कर चुके हैं जनसंख्या का पीक, जानें आगे क्या होगा

Knews Desk- दुनिया की आबादी को लेकर तस्वीर तेजी से बदल रही है। एक समय जहां लगातार बढ़ती जनसंख्या सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थी, वहीं अब कई देशों के सामने घटती आबादी नई चुनौती बन चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक, दुनिया के 64 देश और क्षेत्र अपनी जनसंख्या के चरम स्तर को पार कर चुके हैं और अब वहां आबादी में गिरावट का दौर शुरू हो गया है।

इन देशों में यूरोप और पूर्वी एशिया के कई राष्ट्र शामिल हैं। कम होती जन्म दर, लंबे समय तक कम फर्टिलिटी रेट और कुछ देशों से लोगों के बाहर जाने के कारण वहां जनसंख्या घट रही है।

भारत की स्थिति फिलहाल इन देशों से अलग है। दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत में जनसंख्या अभी बढ़ रही है। हालांकि, यह वृद्धि हमेशा जारी नहीं रहने वाली। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों पर आधारित विश्लेषण के मुताबिक, भारत 2060 के दशक में अपनी जनसंख्या के पीक पर पहुंच सकता है। इसके बाद आबादी में धीरे-धीरे गिरावट शुरू होने का अनुमान है।

यानी भारत के सामने आने वाले दशकों में बढ़ती आबादी के साथ-साथ भविष्य में कम होती आबादी की चुनौती भी खड़ी हो सकती है।

जापान, चीन और दक्षिण कोरिया में शुरू हो चुकी गिरावट

जनसंख्या के पीक के बाद गिरावट का उदाहरण जापान, इटली, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में देखा जा सकता है। जापान और इटली अपनी अधिकतम आबादी को पार किए काफी समय हो चुका है। वहीं चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की आबादी भी अपने चरम स्तर को पार कर चुकी है।

अगर मौजूदा अनुमान लंबे समय तक सही रहते हैं, तो 2100 तक दक्षिण कोरिया और चीन की आबादी मौजूदा स्तर के आधे से भी कम हो सकती है। इटली, स्पेन और थाईलैंड जैसे देशों में भी बड़ी आबादी घटने का अनुमान है।

आखिर आबादी के पीक का मतलब क्या है?

किसी देश की जनसंख्या का पीक वह समय होता है जब उसकी आबादी अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचती है। इसके बाद अगर जन्म लेने वालों की संख्या मरने वालों से कम हो जाए और इस अंतर की भरपाई माइग्रेशन से न हो, तो कुल आबादी घटने लगती है। इस पूरी प्रक्रिया पर तीन प्रमुख चीजों का असर पड़ता है—फर्टिलिटी रेट, लोगों की औसत आयु और माइग्रेशन।

जनसंख्या के अनुमान में माइग्रेशन यानी लोगों का एक देश से दूसरे देश जाना बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमेरिका इसका बड़ा उदाहरण है। वहां जन्म दर कम होने के बावजूद इमिग्रेशन की वजह से आबादी में लंबे समय तक बढ़ोतरी जारी रहने का अनुमान लगाया गया है।

अगर अमेरिका में माइग्रेशन को पूरी तरह रोक दिया जाए, तो उसकी आबादी भी अपेक्षाकृत जल्दी अपने पीक पर पहुंच सकती है और इसके बाद इसमें बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

भारत के लिए आगे क्या चुनौती होगी?

भारत के पास अभी जनसंख्या का लाभ यानी बड़ी कामकाजी आबादी का फायदा उठाने का मौका है। लेकिन आने वाले दशकों में जन्म दर और परिवार के आकार में बदलाव के कारण उम्रदराज आबादी का हिस्सा बढ़ सकता है।

अगर भारत भी मौजूदा वैश्विक ट्रेंड की तरह कम फर्टिलिटी रेट की ओर बढ़ता रहा, तो 2060 के दशक के बाद आबादी में गिरावट शुरू होने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले वर्षों में जन्म दर, जीवन प्रत्याशा और माइग्रेशन किस दिशा में जाते हैं।

दुनिया अब सिर्फ बढ़ती आबादी की समस्या पर चर्चा नहीं कर रही। कई देशों में घटती आबादी, बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और कम होती वर्कफोर्स बड़ी चुनौती बन चुकी है।

भारत फिलहाल उस दौर में है जहां उसकी आबादी बढ़ रही है, लेकिन आगे चलकर उसे भी जनसंख्या के बदलते ढांचे के लिए तैयार रहना होगा। मौजूदा अनुमानों के अनुसार 2060 का दशक भारत की जनसंख्या के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

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