KNEWS DESK- सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायु सेना के कर्मियों की सेवा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि वायु सेना के कर्मचारी किसी असैन्य (सिविल) पद पर चयन होने के बाद अपनी इच्छा से नौकरी नहीं छोड़ सकते। सेवा से मुक्त होने के लिए संबंधित अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है और इसे केवल औपचारिक प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तय नियमों का सख्ती से पालन किया जाना जरूरी है। अदालत ने कहा कि पूर्व स्वीकृति की व्यवस्था केवल कागजी औपचारिकता नहीं है, बल्कि सैन्य अनुशासन और संचालन व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी भारतीय वायु सेना के कारपोरल (गैर-कमीशन अधिकारी) नखत सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। नखत सिंह का चयन राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में सहायक प्रोफेसर (हिंदी) के पद के लिए हुआ था। चयन के बाद उन्होंने वायु सेना से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने और सेवा से मुक्त किए जाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, एयर ऑफिसर कमांडिंग ने अक्टूबर 2022 में उनका आवेदन खारिज कर दिया था। अधिकारियों का कहना था कि निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार उन्हें सेवा से मुक्त नहीं किया जा सकता। इसके बाद नखत सिंह ने इस फैसले को चुनौती देते हुए पहले सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (Armed Forces Tribunal) और फिर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन दोनों जगह उन्हें राहत नहीं मिली।
इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने सैन्य सेवा की विशेष प्रकृति पर जोर देते हुए कहा कि सशस्त्र बलों में नियुक्त कर्मियों की जिम्मेदारियां सामान्य सरकारी कर्मचारियों से अलग होती हैं। इसलिए यदि कोई सैन्य कर्मी किसी अन्य सरकारी या असैन्य पद पर जाना चाहता है, तो उसे निर्धारित नियमों और अनुमोदन प्रक्रिया का पालन करना होगा। पीठ ने कहा कि सेना, नौसेना और वायु सेना जैसे रक्षा संगठनों की कार्यक्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि उनके पास हर समय पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हों। यदि कर्मियों को बिना अनुमति नौकरी छोड़ने की छूट दे दी जाए, तो इससे परिचालन तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि किसी अन्य सरकारी नौकरी में चयन हो जाना अपने आप सेवा छोड़ने का अधिकार नहीं देता। अंतिम निर्णय संबंधित सैन्य अधिकारियों के विवेक और लागू नियमों के अनुसार ही होगा। इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने नखत सिंह की याचिका खारिज कर दी और वायु सेना के निर्णय को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि सैन्य सेवाओं में अनुशासन, प्रशासनिक प्रक्रिया और परिचालन आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
यह फैसला भविष्य में उन सैन्य कर्मियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो किसी अन्य सरकारी या असैन्य पद पर चयन के बाद सेवा छोड़ना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन और संबंधित अधिकारियों की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।