Knews Desk- होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक तनाव और पेट्रोल-डीजल व गैस आपूर्ति पर संभावित संकट के बीच भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अब सप्ताह के कुछ विशेष दिनों में केवल वर्चुअल सुनवाई कराने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में लिया गया है।
सोमवार और शुक्रवार को सिर्फ ऑनलाइन सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, अब “मिसलेनियस डेज़” यानी सोमवार, शुक्रवार और अन्य निर्धारित दिनों पर मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। इससे पहले कोर्ट में हाइब्रिड प्रणाली लागू थी, जिसमें वकील और पक्षकार व्यक्तिगत रूप से या वर्चुअल दोनों तरीके से पेश हो सकते थे नए आदेश के अनुसार आंशिक कार्य दिवसों पर भी केवल वर्चुअल सुनवाई ही होगी। इसका उद्देश्य मौजूदा परिस्थितियों में ईंधन की बचत और प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करना बताया गया है।
DoPT के निर्देशों के बाद लिया गया फैसला
सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भरत पाराशर ने जानकारी दी कि भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा 12 मई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के आधार पर यह कदम उठाया गया है। इसमें प्रशासनिक और कार्य संचालन से जुड़े कई नए उपायों को लागू करने की बात कही गई है।
सर्कुलर में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईंधन के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने आपसी सहमति से कार-पूलिंग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। यह कदम न केवल ईंधन बचत के लिए है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने यह भी तय किया है कि रजिस्ट्री के प्रत्येक शाखा और सेक्शन में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारी सप्ताह में दो दिन तक घर से काम कर सकते हैं। हालांकि, आवश्यक स्टाफ को कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा ताकि कामकाज प्रभावित न हो।
साप्ताहिक रोस्टर और तकनीकी व्यवस्था पर जोर
नए आदेश के तहत संबंधित रजिस्ट्रार को साप्ताहिक रोस्टर तैयार करने, कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और सभी कार्य समय पर पूरे कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है ताकि सुनवाई में कोई बाधा न आए।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और ईंधन संकट को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल संसाधनों की बचत होगी बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।