UPI के जरिए होने वाले चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित चार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नई व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार, UPI स्टीयरिंग कमेटी और NPCI समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
Knews Desk– सुप्रीम कोर्ट में यह मामला मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई के लिए पहुंचा। याचिका में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी UPI भुगतानों पर लगाए जाने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR की वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल ऐसा करने से इनकार कर दिया।
NPCI ने 15 अक्टूबर से चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर चार्ज लागू करने का फैसला किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत चार्ज निर्धारित किया गया है। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर चार्ज की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। हालांकि आम लोगों के बीच होने वाले UPI भुगतानों पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगाया जाएगा।
सरकार के मुताबिक, इस बदलाव से करीब 96 फीसदी व्यापारी लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। इसके अलावा छोटे दुकानदारों को भी प्रस्तावित व्यवस्था में राहत दी गई है। UPI QR के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को किसी चार्ज का भुगतान नहीं करना होगा।
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी इनपुट जैसे क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। इन क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का निश्चित चार्ज निर्धारित किया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI व्यापारी भुगतानों पर चार्ज लगाने का फैसला पर्याप्त कानूनी आधार, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लिया गया। याचिका में जनवरी 2020 से लागू शून्य-शुल्क व्यवस्था में बदलाव को भी चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल 15 अक्टूबर से प्रस्तावित नई चार्ज व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं है। अदालत ने संबंधित पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है, जिसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।