BRICS में कभी कमजोर कड़ी माना जाता था भारत, अब दुनिया के लिए बन चुका है ग्रोथ इंजन

2012 में भारत की अर्थव्यवस्था पर उठ रहे थे सवाल, लेकिन 2026 तक तस्वीर बदल गई. तेज आर्थिक विकास, बेहतर सॉवरेन क्रेडिबिलिटी और बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव ने BRICS में भारत की भूमिका को मजबूत कर दिया है.

Knews Desk- भारत 2026 में BRICS समिट की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है. यह वही भारत है, जिसकी एक दशक से ज्यादा पहले इस समूह में जगह को लेकर सवाल उठाए जाते थे. 2012 में भारत को BRICS की कमजोर कड़ी माना जा रहा था, जबकि आज उसकी पहचान दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और रणनीतिक ताकतों में होती है.

2012 के दौरान भारत की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ गई थी. महंगाई बढ़ रही थी, रुपया दबाव में था और निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा था. ऐसे माहौल में यह बहस तेज हो गई थी कि क्या भारत BRICS का हिस्सा बने रहने की क्षमता रखता है.

BRIC समूह की अवधारणा तैयार करने वाले गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने उस समय वैल्यूएशन के लिहाज से भारत को सबसे कम आकर्षक अर्थव्यवस्था बताया था. इसी दौर में यह सवाल भी उठा कि क्या BRIC में भारत की जगह इंडोनेशिया को शामिल किया जाना चाहिए.

भारत की आर्थिक चुनौतियों का असर उसकी सॉवरेन क्रेडिबिलिटी पर भी दिखाई दे रहा था. 2012 में स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने चेतावनी दी थी कि भारत इन्वेस्टमेंट-ग्रेड सॉवरेन रेटिंग खोने वाला पहला BRIC देश बन सकता है.

2012-13 में भारत की आर्थिक विकास दर 5% से नीचे पहुंच गई थी और महंगाई दोहरे अंक में बनी हुई थी. इससे यह धारणा मजबूत हुई कि भारत BRICS की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर रहा है.

2026 में भारत की आर्थिक तस्वीर बदली

2026 तक भारत की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8% वास्तविक GDP ग्रोथ दर्ज की. इससे वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाए हुए है.

यह आंकड़ा 2012-13 की उस स्थिति से बिल्कुल अलग है, जब भारत की आर्थिक वृद्धि 5% से भी नीचे चली गई थी. तेज ग्रोथ ने भारत को BRICS के प्रमुख आर्थिक विकास इंजनों में शामिल कर दिया है.

भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार का असर उसकी सॉवरेन रेटिंग पर भी पड़ा है. सितंबर 2026 में जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- कर दी. रेटिंग का आउटलुक स्थिर रखा गया.

एजेंसी ने इस सुधार के पीछे भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बेहतर राजकोषीय स्थिति, मजबूत वित्तीय व्यवस्था और बाहरी क्षेत्र की बेहतर स्थिति को प्रमुख कारण बताया. यह बदलाव उस दौर से काफी अलग है, जब भारत के इन्वेस्टमेंट-ग्रेड स्टेटस पर खतरा मंडरा रहा था.

आर्थिक ताकत के साथ बढ़ा कूटनीतिक प्रभाव

भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत अब उसके रणनीतिक प्रभाव में भी बदल रही है. अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव तथा दुनिया में बन रहे भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलित कूटनीति का महत्व बढ़ा है.

चैथम हाउस के मुताबिक, बदलते वैश्विक समीकरणों ने रणनीतिक संतुलन और मिडिल-पावर डिप्लोमेसी के लिए भारत के दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बना दिया है.

2026 BRICS समिट में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान जैसे नेताओं की मौजूदगी भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाती है.

BRICS में भारत की भूमिका अब पहले से ज्यादा मजबूत

2026 में भारत BRICS की मेजबानी ऐसे समय कर रहा है, जब उसकी अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षमता और रणनीतिक भूमिका तीनों का विस्तार हो रहा है. मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरती तकनीकों में भारत की भागीदारी बढ़ी है.

2012 में जहां भारत को समूह की कमजोर कड़ी के तौर पर देखा जाता था, वहीं अब वह BRICS के आर्थिक विकास, वैश्विक दक्षिण की आवाज और रणनीतिक एजेंडे को प्रभावित करने वाली प्रमुख ताकत बनकर उभरा है.

भारत की बदली हुई स्थिति यह बताती है कि एक दशक से ज्यादा समय में आर्थिक सुधार, मजबूत संस्थागत व्यवस्था और बढ़ते वैश्विक प्रभाव ने उसकी अंतरराष्ट्रीय हैसियत को कितना बदल दिया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *