गुजरात में कांग्रेस का नया प्लान! सुरजेवाला ने संभाली कमान, रोजगार-किसान-युवा पर जोर

Knews Desk – अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात भी शामिल है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। गुजरात में भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से सत्ता में है और कांग्रेस आगामी चुनाव के लिए अपनी संगठनात्मक और चुनावी रणनीति तैयार कर रही है।

कांग्रेस ने रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का नया AICC प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। द इंडियन एक्सप्रेस की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने गुजरात चुनाव के लिए केंद्रीय स्तर पर रणनीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। सुरजेवाला का गुजरात दौरा भी इसी चुनावी तैयारियों के बीच हुआ।

गुजरात में कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, पार्टी राज्य के स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने की योजना बना रही है। इसके अलावा पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत करने और राज्य स्तर पर चुनावी अभियान तैयार करने पर भी जोर है।

रणदीप सुरजेवाला इससे पहले कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी महासचिव रह चुके हैं। 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल कर राज्य में सरकार बनाई थी। हालांकि, गुजरात में पार्टी की मौजूदा रणनीति और उसके चुनावी प्रभाव का आकलन चुनाव के दौरान सामने आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और परिणामों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

गुजरात में इस समय बीजेपी के अलावा आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दल भी सक्रिय हैं। हाल के स्थानीय चुनावों में दक्षिण गुजरात के कुछ इलाकों में AAP के प्रदर्शन ने भी राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, नर्मदा जिला पंचायत में AAP ने पहली बार जीत दर्ज की और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने नर्मदा और भरूच जिलों में संगठनात्मक बदलाव भी किए हैं।

कांग्रेस की गुजरात रणनीति में स्थानीय मुद्दों को महत्व देने की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब राज्य में चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। वहीं, बीजेपी भी गुजरात में संगठनात्मक स्तर पर बदलाव और चुनावी तैयारियां कर रही है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की गतिविधियां लगातार बढ़ने की संभावना है।

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