बांग्लादेश में गारमेंट कर्मचारियों का न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग को लेकर आंदोलन हिंसक हो गया है। ढाका समेत कई औद्योगिक इलाकों में आगजनी, सड़क जाम और पुलिस से झड़पों के बाद 600 से अधिक कारखानों में कामकाज बंद हो गया। इससे करीब 17 लाख कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।
Knews Desk – बांग्लादेश में गारमेंट उद्योग के कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है। राजधानी ढाका, गाजीपुर और सावर-अशुलिया में प्रदर्शनकारियों की आगजनी, हाईवे जाम और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। बिगड़ते हालात के बीच 600 से अधिक फैक्ट्रियों में उत्पादन रोक दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थिति से करीब 17 लाख कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।
हालात पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े हैं। रिपोर्ट में अब तक 82 उपद्रवियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई है। शनिवार और रविवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सोमवार को कुछ कपड़ा फैक्ट्रियों में कामकाज दोबारा शुरू हुआ था, लेकिन मजदूरों और पुलिस के बीच फिर झड़पें होने के बाद सैकड़ों कारखानों को उत्पादन रोकना पड़ा।
12,500 से बढ़ाकर 30,000 टका वेतन करने की मांग
बांग्लादेश में गारमेंट कर्मचारियों का मौजूदा न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका बताया गया है। कर्मचारी इसे बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं। उनका आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है, जब सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए नए वेतनमान की घोषणा की है। इससे उनके वेतन और भत्तों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
कर्मचारियों की मांग को लेकर श्रमिक संगठनों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच तनाव बढ़ गया है। वेतन में बढ़ोतरी को लेकर सहमति नहीं बनने के कारण औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदर्शन तेज हुए हैं।
फैक्ट्री मालिकों ने बताईं आर्थिक चुनौतियां
दूसरी ओर, फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि कपड़ा उद्योग को कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार से घटते ऑर्डर, उत्पादों की स्थिर कीमतें और आयातित कच्चे माल की बढ़ती लागत शामिल हैं। मालिकों का तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियों में कर्मचारियों की मांग के मुताबिक वेतन बढ़ाना मुश्किल होगा।
वेतन को लेकर कर्मचारियों और उद्योग प्रबंधन के बीच जारी गतिरोध ने उत्पादन और कामकाज को प्रभावित किया है। यदि प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर बांग्लादेश के कपड़ा निर्यात और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों पर भी पड़ सकता है।
कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह उद्योग हर साल लगभग 40 अरब डॉलर की कमाई करता है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का करीब 10 प्रतिशत है।
ऐसे में बड़ी संख्या में फैक्ट्रियों का बंद होना देश के उत्पादन, रोजगार और निर्यात पर असर डाल सकता है। फिलहाल वेतन बढ़ाने की मांग, उद्योग की आर्थिक चुनौतियां और हिंसक प्रदर्शनों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।