पाकिस्तान में चीन-तुर्किये की हलचल से बढ़ी टेंशन, एयरबेस पर लगातार पहुंच रहे सैन्य विमान

Knews Desk– पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर पिछले करीब 60 घंटों में चीन और तुर्किये के सैन्य परिवहन विमानों की लगातार आवाजाही ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं. सूत्रों के मुताबिक, चीन के Y-20 सैन्य परिवहन विमान पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस और कराची के मस्रूर एयरबेस पर देखे गए हैं. वहीं, तुर्किये के A400M और C-130 हरक्यूलिस विमान भी पाकिस्तान के अलग-अलग एयरबेस पर पहुंचे हैं. इस गतिविधि पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की भी नजर बनी हुई है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन और तुर्किये की ओर से पाकिस्तान को संभावित सैन्य सहायता दिए जाने की चर्चा है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि तुर्किये के सैन्य विमानों के जरिए पाकिस्तान को अपग्रेडेड Bayraktar TB2T-AI ड्रोन और Kemankes सीरीज की लाइटरिंग म्यूनिशन से जुड़े उपकरण पहुंचाए जा सकते हैं. इन हथियार प्रणालियों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है.Bayraktar TB2T-AI ड्रोन को पुराने TB2 प्लेटफॉर्म का उन्नत संस्करण बताया जा रहा है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित क्षमताएं शामिल होने की बात कही जा रही है. इससे निगरानी, लक्ष्य की पहचान और ऑपरेशन के दौरान निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होने का दावा किया जाता है. अगर पाकिस्तान को ऐसी प्रणालियां मिलती हैं तो उसकी ड्रोन और निगरानी क्षमता में इजाफा हो सकता है.

इसी बीच तुर्किये के ANKA-3 स्टील्थ ड्रोन को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एक C-130 विमान के जरिए कराची के रास्ते पाकिस्तान के लिए ANKA-3 से संबंधित उपकरण पहुंचाए गए हो सकते हैं. ANKA-3 एक मानव रहित लड़ाकू विमान परियोजना है, जिसे तुर्किये ने जमीन और समुद्र से जुड़े लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए विकसित किया है. हालांकि, पाकिस्तान को इसकी वास्तविक आपूर्ति को लेकर अभी स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है.चीन की गतिविधियों को लेकर भी कई दावे किए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Y-20 विमान पाकिस्तान के लिए J-10CE लड़ाकू विमानों, JF-17 फाइटर जेट और VT-4 टैंकों से जुड़े स्पेयर पार्ट्स या सैन्य उपकरण लेकर पहुंचे हो सकते हैं. इसके अलावा HQ-9 और HQ-16 एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े उपकरणों की संभावित आपूर्ति की भी चर्चा है. यदि ये दावे सही साबित होते हैं तो पाकिस्तान की वायु रक्षा और सैन्य तैयारियों को इससे मजबूती मिल सकती है.

चीन और तुर्किये की इस बढ़ी हुई सैन्य आवाजाही को लेकर सबसे अहम सवाल यही है कि पाकिस्तान में आखिर क्या तैयारी चल रही है. अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन या अभियान की निश्चित पुष्टि नहीं हुई है. सैन्य परिवहन विमानों की आवाजाही का इस्तेमाल उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, लॉजिस्टिक सपोर्ट या अन्य सैन्य जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है.भारत के लिए पाकिस्तान में चीन और तुर्किये की बढ़ती रक्षा गतिविधियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं. फिलहाल इन गतिविधियों को लेकर सामने आ रहे ज्यादातर दावे सूत्रों और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और इनके आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.

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