Knews Desk- अमेरिका में आव्रजन नीतियों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा लाए गए नए प्रस्ताव के तहत ग्रीन कार्ड और नागरिकता प्रक्रिया की फीस में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। अगर यह नियम लागू होता है, तो इसका सीधा असर अमेरिका में रहने वाले लाखों अप्रवासियों, खासकर भारतीय समुदाय पर पड़ने की आशंका है।
यह प्रस्ताव यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) द्वारा तैयार किया गया है और इसे इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट तथा होमलैंड सिक्योरिटी एक्ट, 2002 की विभिन्न धाराओं के तहत लागू करने की बात कही गई है। प्रस्ताव के अनुसार, फॉर्म N-400 यानी अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने की लागत में 75 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
नए नियम के तहत पेपर फाइलिंग की फीस 760 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 1,330 डॉलर तक पहुंच सकती है, जबकि ऑनलाइन आवेदन की लागत 710 डॉलर से बढ़कर 1,280 डॉलर हो सकती है। यह बढ़ोतरी अप्रवासियों के लिए नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया को काफी महंगा बना सकती है। हालांकि, प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि जिन आवेदकों की आय फेडरल पॉवर्टी गाइडलाइंस के 400 प्रतिशत से कम है, उनके लिए कुछ रियायतें जारी रह सकती हैं। ऐसे मामलों में आवेदन शुल्क 380 डॉलर के आसपास रहने की संभावना है। लेकिन कम फीस विकल्प केवल पेपर फाइलिंग तक सीमित हो सकता है।
साथ ही, इस नए प्रस्ताव में फीस माफी (fee waiver) को खत्म करने की भी बात कही गई है, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के आवेदकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। नियम को लागू करने से पहले 60 दिनों की पब्लिक कमेंट अवधि रखी जाएगी, जिसके बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर भारतीय मूल के लोगों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि अमेरिका में अप्रवासियों की एक बड़ी संख्या भारतीय समुदाय की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में लाखों भारतीय रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में टेक्नोलॉजी और प्रोफेशनल सेक्टर से जुड़े लोग शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में लगभग 66,800 भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिला था, हालांकि यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कम बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि फीस बढ़ने से नागरिकता आवेदन की प्रक्रिया धीमी हो सकती है और कई लोग वैकल्पिक विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा प्रणाली में सख्ती की थी और इसकी फीस को कई गुना बढ़ाने का निर्णय लिया था। यह वीजा प्रोग्राम विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है, जिसमें भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक मानी जाती है।
अब नए प्रस्ताव के बाद एक बार फिर अमेरिकी आव्रजन नीति को लेकर बहस तेज हो गई है और इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर, खासकर भारतीय प्रवासियों पर, महत्वपूर्ण रूप से देखा जा सकता है।