KNEWS DESK- समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी से जुड़े कथित AI-जनरेटेड वीडियो के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए उन वीडियो को हटाने का निर्देश दिया है, जिनमें कथित तौर पर शेरवानी पर प्रयागराज में अतीक अहमद को गैंगस्टर बनने में मदद करने का आरोप लगाया गया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने Meta को संबंधित URL को 36 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही वीडियो पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी अगले आदेश तक इस तरह की सामग्री प्रकाशित करने पर रोक लगाई गई है।
जन चौपाल पोस्ट ने शेयर किया था वीडियो
मामला सोशल मीडिया पर जन चौपाल पोस्ट नाम के अकाउंट से शेयर किए गए वीडियो से जुड़ा है। बताया गया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रकाशित इस वीडियो में सपा नेता सलीम इकबाल शेरवानी को लेकर कई आरोप लगाए गए थे। वीडियो में कथित तौर पर यह दावा किया गया था कि शेरवानी ने प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद को गैंगस्टर के रूप में उभरने में मदद की थी। शेरवानी ने इन आरोपों और वीडियो को लेकर अदालत का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया राहत देते हुए संबंधित सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया।
Meta को 36 घंटे में कार्रवाई का आदेश
अदालत ने Meta को निर्देश दिया कि वह आदेश में बताए गए फेसबुक और इंस्टाग्राम URL को 36 घंटे के भीतर अपने प्लेटफॉर्म से हटाए। इसके अलावा जन चौपाल पोस्ट और एक अन्य सोशल मीडिया अकाउंट को भी अगले आदेश तक विवादित वीडियो को दोबारा प्रकाशित या प्रसारित करने से रोक दिया गया है। अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को तय समय सीमा के अंदर कार्रवाई करनी होगी।
AI से बनाए गए वीडियो का दावा
मामले में विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संबंधित वीडियो को AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया बताया गया है। वीडियो में शेरवानी के संबंध में अतीक अहमद से जुड़े आरोप लगाए गए थे। AI से तैयार कंटेंट और डीपफेक जैसी तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाली सामग्री को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में भी अदालत के सामने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और उसमें किए गए कथित दावों को चुनौती दी गई।
वीडियो के प्रकाशन पर भी रोक
दिल्ली हाई कोर्ट ने केवल मौजूदा वीडियो हटाने का ही निर्देश नहीं दिया, बल्कि जन चौपाल पोस्ट और एक अन्य सोशल मीडिया अकाउंट को अगले आदेश तक संबंधित वीडियो को प्रकाशित करने से भी रोक दिया है। इसका मतलब है कि अदालत के अगले आदेश तक इन अकाउंट्स की ओर से विवादित वीडियो को दोबारा फेसबुक, इंस्टाग्राम या संबंधित माध्यमों पर पोस्ट नहीं किया जा सकेगा।
हालांकि अदालत का यह आदेश मामले के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। केस में आगे की सुनवाई के बाद ही विवाद से जुड़े सभी पहलुओं पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
सोशल मीडिया पर AI कंटेंट को लेकर बढ़ती चुनौती
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI से तैयार वीडियो, तस्वीरें और ऑडियो भी तेजी से सामने आ रहे हैं। ऐसे कंटेंट में वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना कई बार मुश्किल हो जाता है। खासकर राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े AI वीडियो के मामले में गलत जानकारी और मानहानि की आशंका बढ़ जाती है।
फिलहाल सलीम इकबाल शेरवानी से जुड़े इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम हस्तक्षेप करते हुए Meta को 36 घंटे के भीतर संबंधित URL हटाने और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स को अगले आदेश तक वीडियो प्रकाशित नहीं करने का निर्देश दिया है।