पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर आंकड़ों ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। 38 लाख से ज्यादा अपीलें दाखिल होने के बावजूद अब तक सिर्फ करीब 82 हजार मामलों का निपटारा हुआ है। खास बात यह है कि जिन मामलों पर फैसला आया, उनमें 91 फीसदी से ज्यादा लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ दिए गए।
Knews Desk– पश्चिम बंगाल में SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव के बाद अब अपीलों के निपटारे की रफ्तार चर्चा का विषय बन गई है। 7 अगस्त 2026 तक राज्य के अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने कुल 38,10,620 अपीलें दाखिल की गई थीं। इनमें से केवल 82,782 मामलों पर ही अब तक फैसला हो सका है। इसका मतलब है कि करीब 97.83 फीसदी मामले अभी भी लंबित हैं।
अब तक जिन मामलों पर सुनवाई पूरी हुई, उनमें 75,443 लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने का फैसला हुआ। वहीं 7,339 मामलों में नाम हटाने का फैसला बरकरार रखा गया। यानी जिन मामलों का निपटारा हुआ, उनमें करीब 91.13 फीसदी फैसले वोटर का नाम वापस जोड़ने के पक्ष में रहे।
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा 7,47,305 अपीलें दाखिल हुई हैं। हालांकि इतनी बड़ी संख्या के मुकाबले सिर्फ 487 मामलों का निपटारा हुआ। इनमें 434 लोगों के नाम वापस जोड़ दिए गए, जबकि 53 मामलों में नाम हटाने का फैसला कायम रहा।
मालदा में 5,31,149 अपीलें दाखिल की गईं। यहां अब तक 1,471 मामलों पर फैसला हुआ और सभी मामलों में संबंधित लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने का निर्णय लिया गया। उत्तर 24 परगना में 3,58,872 अपीलें आईं, लेकिन सिर्फ 277 मामलों पर फैसला हुआ और इन सभी मामलों में नाम दोबारा जोड़ दिए गए।
दक्षिण 24 परगना में 3,21,332 अपीलें दाखिल हुईं। यहां अब तक 20,107 लोगों के नाम वापस मतदाता सूची में जोड़े गए, जबकि 24 मामलों में नाम हटाने का फैसला हुआ। नाम दोबारा जोड़ने के लिहाज से यह जिला सबसे आगे रहा है।
कुछ जिलों के आंकड़े खास तौर पर ध्यान खींचते हैं। मालदा और उत्तर 24 परगना में जिन मामलों पर अब तक फैसला हुआ, उनमें एक भी नाम हटाने का निर्णय नहीं लिया गया। जलपाईगुड़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने बताया था कि अपील के बाद 665 लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए और एक भी नाम बाहर नहीं किया गया।
दार्जिलिंग में कुल 50,712 अपीलें दाखिल हुईं। इनमें से 160 मामलों का निपटारा हुआ। 159 लोगों के नाम दोबारा जोड़े गए, जबकि केवल एक मामले में नाम हटाने का फैसला हुआ।
SIR के दौरान मतदाता सूची में कुल मतदाताओं की संख्या में भी बड़ी कमी दर्ज हुई है। 2024 की वोटर लिस्ट में पश्चिम बंगाल में 7,60,10,006 मतदाता दर्ज थे। 28 फरवरी 2026 को जारी अंतिम SIR सूची में यह संख्या घटकर 6,44,52,609 रह गई। यानी कुल 1,15,57,397 मतदाताओं की संख्या कम हुई, जो करीब 15.21 फीसदी की गिरावट है।
जिलों की बात करें तो उत्तर 24 परगना में सबसे ज्यादा 14,44,123 मतदाताओं की संख्या कम हुई। इसके बाद मुर्शिदाबाद में 13,27,896 और दक्षिण 24 परगना में 12,85,364 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई। प्रतिशत के लिहाज से सबसे बड़ी गिरावट कोलकाता दक्षिण में हुई, जहां मतदाताओं की संख्या करीब 32.29 फीसदी कम हुई। मालदा में भी 31.69 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
इसके विपरीत पूर्व मेदिनीपुर में मतदाताओं की संख्या में सबसे कम 3.97 फीसदी की कमी आई। बैंकुड़ा में यह गिरावट 4.64 फीसदी और पश्चिम मेदिनीपुर में 5.75 फीसदी रही।
हालांकि 38 लाख अपीलों को सीधे तौर पर 38 लाख ऐसे मतदाताओं से जोड़ना सही नहीं है, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बताया गया कि करीब 31 लाख अपीलें ऐसे मामलों से जुड़ी हैं, जिनमें किसी दूसरे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। वहीं लगभग 7 लाख अपीलें उन लोगों ने दाखिल की हैं, जिनके अपने नाम सूची से बाहर हो गए थे और वे उन्हें फिर से जोड़ने की मांग कर रहे हैं।
SIR को लेकर कांग्रेस नेता और याचिकाकर्ता प्रसेनजीत बोस ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच के बाद करीब 27 लाख मतदाताओं को ‘नॉट एलिजिबल’ माना गया था, लेकिन इनमें से लगभग 7 लाख लोगों ने ही खुद अपील की। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में अन्य अपीलें निर्वाचन आयोग या दूसरे आपत्तिकर्ताओं की ओर से दाखिल की गई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल लंबित 37 लाख से ज्यादा अपीलों को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं, उनकी अपीलों पर उचित समय में सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से लंबित मामलों का पूरा विवरण और उनके जल्द निपटारे के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है। ऐसे में आने वाले दिनों में ट्रिब्यूनल की कार्रवाई और इन अपीलों के नतीजे बंगाल की वोटर लिस्ट को लेकर तस्वीर और साफ कर सकते हैं।