Knews Desk-देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव का प्रकोप जारी है। उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि वास्तविक महसूस होने वाला तापमान इससे भी अधिक बताया जा रहा है। इसी बीच मौसम वैज्ञानिकों ने 2026 में संभावित ‘सुपर अल-नीनो’ को लेकर चेतावनी दी है, जो आने वाले महीनों में भारत समेत पूरी दुनिया के मौसम को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
क्या है सुपर अल-नीनो?
अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र के तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण होती है। सामान्य परिस्थितियों में पूर्वी हवाएं गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं, लेकिन अल-नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर हो जाती हैं, जिससे गर्म पानी वापस पूर्वी प्रशांत की ओर फैल जाता है। जब समुद्र सतह का तापमान सामान्य से लगभग 0.5 से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है, तो इसे सामान्य अल-नीनो कहा जाता है। लेकिन जब यह वृद्धि 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाती है, तो इसे ‘सुपर अल-नीनो’ कहा जाता है- जो एक दुर्लभ और अत्यंत शक्तिशाली जलवायु स्थिति होती है।
भारत पर संभावित प्रभाव

सुपर अल-नीनो का प्रभाव वैश्विक स्तर पर होता है, लेकिन भारत इसके सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। इसका सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ता है, जो देश की कृषि और जल आपूर्ति की रीढ़ है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुपर अल-नीनो की स्थिति में मानसून कमजोर पड़ सकता है या बारिश में बड़ी कमी आ सकती है। इससे सूखा, जल संकट और फसल उत्पादन में भारी गिरावट की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही हीटवेव की घटनाएं भी तेज और लंबी हो सकती हैं। खेती पर इसका सीधा असर पड़ता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है और खाद्य सुरक्षा पर भी दबाव बढ़ता है। कई क्षेत्रों में पानी की कमी और जलाशयों के सूखने जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
पिछले सुपर अल-नीनो के अनुभव
भारत ने पहले भी तीन बड़े सुपर अल-नीनो के प्रभाव देखे हैं-1982-83, 1997-98 और 2015-16।
- 1982-83: देश के कई हिस्सों में गंभीर सूखा पड़ा था। कृषि उत्पादन पर बड़ा असर हुआ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।
- 1997-98: इस दौरान वैश्विक स्तर पर असामान्य मौसम देखा गया, कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा। भारत में मानसून कमजोर रहा।
- 2015-16: इस अवधि में भी कई राज्यों में बारिश कम रही और हीटवेव की घटनाएं बढ़ गईं।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि सुपर अल-नीनो का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक ढांचे को भी प्रभावित करता है।
नाम ‘अल-नीनो’ की उत्पत्ति
‘अल-नीनो’ स्पेनिश भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘छोटा बच्चा’। पेरू और इक्वाडोर के मछुआरों ने इस शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि यह घटना अक्सर क्रिसमस के आसपास दिखाई देती थी, जिसे ईसा मसीह के बाल रूप से जोड़ा जाता था। शुरुआत में इसे केवल स्थानीय समुद्री घटना माना जाता था, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है।
अल-नीनो और ला-नीना में अंतर
अल-नीनो और ला-नीना एक-दूसरे के विपरीत जलवायु घटनाएं हैं। जहां अल-नीनो में समुद्र का पानी गर्म होता है, वहीं ला-नीना में वही पानी सामान्य से ठंडा हो जाता है। ला-नीना के दौरान भारत में मानसून अक्सर मजबूत होता है और अच्छी बारिश होती है। इससे कृषि को लाभ मिलता है, हालांकि कई बार अत्यधिक बारिश बाढ़ का कारण भी बन सकती है।
वैश्विक प्रभाव
अल-नीनो केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है। कहीं सूखा पड़ता है, तो कहीं भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बनती है। कुछ क्षेत्रों में तापमान बढ़ता है, तो कुछ में असामान्य ठंड या गर्मी देखने को मिलती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, सुपर अल-नीनो की स्थिति में यह प्रभाव और अधिक चरम हो सकता है, जिससे वैश्विक जलवायु असंतुलन पैदा होने का खतरा रहता है।
क्या इसे रोका जा सकता है?
अल-नीनो और ला-नीना प्राकृतिक घटनाएं हैं, जिन्हें रोका नहीं जा सकता। हालांकि, वैज्ञानिक इनके पूर्वानुमान में लगातार सुधार कर रहे हैं, जिससे सरकारें और आम लोग पहले से तैयारी कर सकें।
तैयारी और सावधानी
विशेषज्ञों का सुझाव है कि जल संरक्षण, कृषि में अनुकूलन, और मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। किसानों को फसल पैटर्न में बदलाव और जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वहीं आम लोगों को हीटवेव के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सुपर अल-नीनो एक गंभीर जलवायु घटना है, जिसका असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी पृथ्वी के मौसम, कृषि और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। यदि 2026 में इसका प्रभाव मजबूत होता है, तो भारत को गर्मी, सूखा और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सही जानकारी और समय पर तैयारी ही इसके प्रभाव को कम करने का सबसे बड़ा उपाय है।