चढ़ावा चोरी मामले मे राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफे के बाद, कृष्ण मोहन को मिली ​जिम्मेदारी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक हुई. बैठक में ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है.

Knews Desk- राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक हुई. बैठक में ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रस्ट की ओर से कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने बताया गया कि चढ़ावा चोरी का पाप गिनती के समय हुआ है. इस घटना से हम लोग दुखी हैं. गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि ट्रस्ट के महा​सचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है. गोविंद ​देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट में बदलाव पर भी सहमति बनी है.

कृष्ण मोहन को सौंपी गई जिम्मेदारी
गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि ट्रस्ट के महा​सचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है. गोविंद ​देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट में बदलाव पर भी सहमति बनी है. उन्होंने कहा कि कृष्ण मोहन को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि चंपत राय को बड़ी वेदना हुई और उन्हें लगा कि जब तक अपराधियों को सजा नहीं मिल जाती तब तक सेवा में रहना सही नहीं है. ऐसे में उन्होंने त्यागपत्र दिया है. उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार, त्यागपत्र देते ही उसे स्वीकार माना जाता है. इस परिस्थिति में उन्होंने उधारता दिखाई है, उसका सम्मान किया गया. 

जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा फैसला

ट्रस्ट की बैठक में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि अब दान काउंटर और गिनती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत किया जाएगा। सीसीटीवी निगरानी को और बढ़ाने के साथ-साथ हर गतिविधि की रियल टाइम मॉनिटरिंग का भी प्रस्ताव रखा गया है। ट्रस्ट का मानना है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विशेष जांच समिति का गठन

बैठक में इस पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने पर सहमति बनी है। यह समिति न केवल चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया की जांच करेगी बल्कि आंतरिक व्यवस्था में संभावित खामियों की भी पहचान करेगी। समिति को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

संत समाज और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

इस घटना को लेकर संत समाज और श्रद्धालुओं में भी चिंता का माहौल देखा जा रहा है। कई संतों ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि धार्मिक संस्थानों की पवित्रता और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। वहीं श्रद्धालुओं ने भी मांग की है कि चढ़ावा व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित और डिजिटल बनाया जाए ताकि विश्वास बना रहे।

भविष्य की रूपरेखा और सुधार की दिशा

ट्रस्ट ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में राम मंदिर परिसर में दान और प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना पर काम किया जाएगा। इसके तहत कैशलेस दान, ऑडिट सिस्टम और स्वचालित रिकॉर्डिंग प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी। ट्रस्ट का कहना है कि यह पूरा कदम केवल व्यवस्था सुधार के लिए नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है।

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