Knews Desk – इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़ी कथित यौन शोषण सामग्री (CSAM) के प्रसार के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है। आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दोनों मंत्रालयों को अपना जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के मुताबिक, जांच सिर्फ उस व्यक्ति की पहचान तक सीमित नहीं है जिसने कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड की। आयोग अब यह भी जांच कर रहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अपने एडिटोरियल और पब्लिशिंग सिस्टम की इसमें कितनी भूमिका रही। इसके तहत यह देखा जा रहा है कि प्लेटफॉर्म के सिस्टम ने कंटेंट को बनाने, चुनने, फैलाने, उसकी पहुंच बढ़ाने या उससे कमाई करने में किस हद तक योगदान दिया।इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था भी जांच के दायरे में है। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि प्रतिबंधित सामग्री प्लेटफॉर्म पर कैसे पहुंची और उसे रोकने के लिए मौजूद तकनीकी एवं मॉडरेशन सिस्टम कितने प्रभावी रहे। ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और उसकी ओर से उठाए गए कदमों की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वहीं, मेटा पहले ही बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों पर अपनी जीरो टॉलरेंस नीति की बात कह चुका है। कंपनी का कहना है कि उसके नियमों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों और अकाउंट्स को हटाया गया है। मेटा के मुताबिक, उसके डिटेक्शन सिस्टम की मदद से पिछले छह महीनों में भारत में 1.6 लाख से ज्यादा संदिग्ध अकाउंट्स हटाए गए हैं।मेटा ने उन आरोपों से भी इनकार किया था कि उसने जानबूझकर बच्चों के प्रति अनुचित रुचि रखने वाले लोगों को इस तरह के विज्ञापन दिखाए। कंपनी ने दावा किया कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कंटेंट को रोकने के लिए उसके प्लेटफॉर्म पर कई तरह की तकनीकी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की ओर से भी मेटा इंडिया के शीर्ष अधिकारियों को तलब किए जाने की बात सामने आई थी। कंपनी से प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन उस समय कोई जवाब नहीं मिला। अब NHRC की ओर से मंत्रालयों को नोटिस जारी किए जाने के बाद मामले की जांच और गंभीर हो गई है।NHRC के जवाब मांगने के बाद अब संबंधित मंत्रालयों की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित CSAM के प्रसार को रोकने में संबंधित प्लेटफॉर्म और सरकारी तंत्र की क्या भूमिका रही। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में आने वाले दिनों में और कार्रवाई होने की संभावना है।