Knews Desk– ऋषभ पंत का जन्म 4 अक्टूबर 1997 को उत्तराखंड के रुड़की में हुआ था। हालांकि, क्रिकेट के मैदान पर उनकी पहचान दिल्ली से बनी। जिस समय पंत ने क्रिकेट में कदम रखा, उस समय उत्तराखंड में क्रिकेट के लिए वैसी संगठित व्यवस्था नहीं थी। राज्य की कोई संगठित क्रिकेट एसोसिएशन और स्टेट टीम भी नहीं थी। ऐसे में उनके परिवार ने उन्हें क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए दिल्ली भेजने का फैसला किया।दिल्ली पहुंचने के बाद पंत ने मशहूर सोनेट क्रिकेट क्लब में क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। उन्हें दिग्गज कोच तारक सिन्हा की निगरानी में प्रशिक्षण मिला। यहीं से उनके क्रिकेट करियर को नई दिशा मिली और आगे चलकर वह भारतीय क्रिकेट के सबसे आक्रामक और दिलेर विकेटकीपर बल्लेबाजों में शामिल हो गए।

पंत के 29वें जन्मदिन पर दिल्ली कैपिटल्स ने सोशल मीडिया पर उन्हें खास अंदाज में बधाई दी। फ्रेंचाइजी ने लिखा कि जब पंत टीम के साथ आए थे, तब वह एक शावक थे, लेकिन अब पूरी दुनिया के लिए बाघ बन चुके हैं। दिल्ली कैपिटल्स ने अपने संदेश में लिखा, “हैप्पी बर्थडे रिशु।” पंत के क्रिकेट सफर को देखते हुए यह संदेश उनके आक्रामक खेल और मैदान पर उनके बेखौफ अंदाज को दर्शाता है।BCCI ने भी ऋषभ पंत को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। बोर्ड ने अपने संदेश में पंत के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किए गए प्रदर्शन और उनके आंकड़ों का जिक्र किया। साथ ही उनके नाम दर्ज दो ICC ट्रॉफियों की उपलब्धियों को भी याद किया गया। पंत ने भारतीय टीम के लिए कई अहम मौकों पर शानदार पारियां खेली हैं और अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता दिखाई है।
फिलहाल ऋषभ पंत जम्मू-कश्मीर में हैं, जहां वह रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी कर रहे हैं। रेस्ट ऑफ इंडिया और रणजी ट्रॉफी की मौजूदा विजेता जम्मू-कश्मीर के बीच ईरानी कप का फाइनल खेला जा रहा है। पंत इस मुकाबले में रेस्ट ऑफ इंडिया की कमान संभाल रहे हैं। हालांकि, फाइनल में उनका प्रदर्शन उनके जाने-पहचाने अंदाज के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन उनके जन्मदिन को लेकर उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।ऋषभ पंत का क्रिकेट सफर संघर्ष, मेहनत और आक्रामक अंदाज का उदाहरण रहा है। रुड़की से दिल्ली पहुंचकर क्रिकेट की ट्रेनिंग लेने वाले पंत ने धीरे-धीरे घरेलू क्रिकेट से भारतीय टीम तक का सफर तय किया। आज उनकी गिनती दुनिया के बेखौफ विकेटकीपर बल्लेबाजों में होती है। उनके 29वें जन्मदिन पर मिली शुभकामनाओं में भी उनके इसी सफर और मैदान पर दिखने वाले जुझारूपन की झलक देखने को मिली।