Assam Flood: तिरपाल के नीचे गुजरा बचपन, हाथ में चमका गोल्ड मेडल… बाढ़ के बीच जनमोनी ने रचा इतिहास

असम की बाढ़ ने 17 साल की कराटे खिलाड़ी जनमोनी कोंवर का घर छीन लिया, लेकिन उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी. परिवार तटबंध पर तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर है, वहीं जनमोनी ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया.

Knews Desk- असम इन दिनों भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है. हजारों परिवार अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं. इन्हीं परिवारों में जोरहाट जिले की रहने वाली 17 वर्षीय कराटे खिलाड़ी जनमोनी कोंवर का परिवार भी शामिल है. बाढ़ में घर डूबने के बाद परिवार 19 जुलाई से तटबंध पर तिरपाल के नीचे रह रहा है. इन मुश्किल परिस्थितियों के बीच जनमोनी ने दिल्ली जाकर राष्ट्रीय स्तर की कराटे प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और स्वर्ण पदक जीतकर लौटीं.

जनमोनी कोंवर का घर जोरहाट जिले के भोगदोइपोरिया गांव के 2 नंबर मोजिया भेटी इलाके में है. बाढ़ का पानी घर में घुसने के बाद परिवार को अपना आशियाना छोड़ना पड़ा. कई दिनों से पूरा परिवार तटबंध पर तिरपाल के नीचे गुजर-बसर कर रहा है.

बाढ़ ने घर के साथ-साथ परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को भी बुरी तरह प्रभावित किया. इसके बावजूद जनमोनी ने अपने खेल और अभ्यास को नहीं छोड़ा. परिवार की परेशानियों के बीच उन्होंने दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया.

दिल्ली में जीता स्वर्ण पदक

जनमोनी ने 7 से 9 अगस्त तक नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. आशिहारा कराटे प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया.

इस प्रतियोगिता में असम से चार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. इनमें एक खिलाड़ी ने कांस्य पदक हासिल किया, जबकि जनमोनी ने स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया.

तिरपाल के नीचे लौटीं, लेकिन हाथ में था गोल्ड

9 अगस्त की शाम जब जनमोनी प्रतियोगिता से वापस अपने परिवार के पास पहुंचीं, तो उनके सामने वही तिरपाल का अस्थायी आशियाना था. बाढ़ के कारण परिवार के पास न पक्का घर बचा था और न ही पहले जैसी सुविधाएं.

लेकिन इस बार जनमोनी के हाथ में कुछ ऐसा था, जिसने परिवार की मुश्किलों के बीच खुशी की वजह दे दी. उनके हाथ में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक था.

एक तरफ परिवार बाढ़ से उजड़े घर को दोबारा बसाने की चिंता में है, तो दूसरी तरफ जनमोनी की उपलब्धि ने मुश्किल दौर में उम्मीद की नई रोशनी जगा दी है.

मुश्किल हालात के आगे नहीं झुका हौसला

जनमोनी की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि संघर्ष और जज्बे की मिसाल है. जिस समय उनका परिवार बाढ़ के पानी और घर छिन जाने की परेशानी से जूझ रहा था, उसी समय वह खेल के मैदान में अपने सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही थीं.

सुविधाओं की कमी और परिवार की मुश्किलों के बावजूद जनमोनी ने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर साबित कर दिया कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादों के सामने उन्हें हराया जा सकता है.

असम में अब भी गंभीर है बाढ़ की स्थिति

जनमोनी की यह उपलब्धि ऐसे वक्त सामने आई है, जब असम के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. 10 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में मौतों का आंकड़ा 101 तक पहुंच गया था. वहीं 10 जिलों में 1,26,431 लोग प्रभावित बताए गए.

DRIMS की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का असर 25 राजस्व सर्किल और 458 गांवों तक पहुंचा है. गोलाघाट सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में है, जहां 71,061 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. इसके बाद शिवसागर में 21,600, नगांव में 16,908 और जोरहाट में 13,166 लोग प्रभावित हुए हैं.

कई इलाकों में पानी कम होना शुरू हुआ है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने से राहत और पुनर्वास प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. ऐसे मुश्किल समय में जनमोनी कोंवर का स्वर्ण पदक बाढ़ की त्रासदी के बीच हिम्मत, उम्मीद और संघर्ष की प्रेरक कहानी बनकर सामने आया है.

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