Asian Games 2026: अनाथ होने के बाद नहीं मानी हार, अमन सहरावत ने वर्ल्ड चैंपियन को हराकर जीता गोल्ड मेडल

Knews Desk- Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में भारत ने कुश्ती के अखाड़े से एक और शानदार उपलब्धि हासिल की है। पेरिस ओलंपिक 2024 के ब्रॉन्ज मेडल विजेता अमन सहरावत ने पुरुषों की 57 किलो फ्रीस्टाइल कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। फाइनल मुकाबले में अमन ने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन हान चोंग-सोंग को 11-7 के अंतर से हराकर एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया।अमन सहरावत के लिए यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि इसके पीछे संघर्ष और मुश्किलों से भरी उनकी कहानी है। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और कुश्ती को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया। आज वही अमन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए लगातार पदक जीत रहे हैं।

फाइनल में आखिरी मिनट में बदला मुकाबला

अमन और हान चोंग-सोंग के बीच फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक रहा। शुरुआत से ही दोनों पहलवानों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। अमन ने फुर्ती दिखाते हुए मुकाबले का पहला अंक हासिल किया और बढ़त बनाने की कोशिश की।मुकाबले के दौरान एक इंजरी ब्रेक भी आया। इसके बाद अमन ने अपना आक्रमण तेज कर दिया और कुछ ही समय में स्कोर 6-1 तक पहुंचा दिया। हालांकि, हान चोंग-सोंग ने हार नहीं मानी। इंजरी ब्रेक के बाद उन्होंने वापसी की और लगातार दांव लगाकर अमन पर दबाव बनाया। उत्तर कोरियाई पहलवान ने अमन को पिन करते हुए मुकाबले में बढ़त हासिल कर ली।जब मुकाबले में एक मिनट से भी कम समय बचा था, तब अमन ने शानदार वापसी की। उन्होंने दबाव के बीच बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन करते हुए चोंग-सोंग को मैट पर लॉक किया और अहम अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने मुकाबले को 11-7 से अपने नाम कर लिया।

हांगझू में ब्रॉन्ज, अब नागोया में गोल्ड

एशियन गेम्स में अमन सहरावत का यह लगातार दूसरा पदक है। इससे पहले हांगझू एशियन गेम्स में उन्होंने इसी 57 किलो फ्रीस्टाइल कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। अब नागोया में उन्होंने अपने पदक का रंग बदलते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया है।मौजूदा एशियन गेम्स में सुजीत कलकल के गोल्ड मेडल के बाद फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत का यह दूसरा गोल्ड है। कुश्ती में भारत के खाते में यह चौथा मेडल भी है।

11 साल की उम्र में सिर से उठा माता-पिता का साया

अमन सहरावत का जन्म 16 जुलाई 2003 को हरियाणा के झज्जर जिले के बिरोहड़ गांव में हुआ था। बचपन से ही उन्हें कुश्ती में दिलचस्पी थी। 2012 लंदन ओलंपिक में सुशील कुमार के सिल्वर मेडल से प्रभावित होकर अमन महज 10 साल की उम्र में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम पहुंच गए थे।लेकिन इसके कुछ समय बाद उनकी जिंदगी में बड़ा दुख आया। जब अमन 11 साल के थे, तब उनके माता-पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनके चाचा सुधीर और परिवार ने अमन और उनकी छोटी बहन पूजा की जिम्मेदारी संभाली।मां के निधन के बाद अमन मानसिक तनाव और डिप्रेशन से भी जूझे, लेकिन उन्होंने अपनी ऊर्जा कुश्ती में लगानी शुरू कर दी। छत्रसाल स्टेडियम में कोच ललित कुमार के मार्गदर्शन में उन्होंने कुश्ती के दांव-पेंच सीखे और लगातार खुद को बेहतर बनाया।पेरिस ओलंपिक 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद अब अमन सहरावत ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ी कामयाबी जोड़ दी है। उनकी कहानी संघर्ष, मेहनत और खेल के प्रति समर्पण की मिसाल बन गई है।

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