KNEWS DESK- रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, खुशहाली और सफलता की कामना करती हैं। लेकिन हर साल रक्षाबंधन के समय भद्रा काल को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं कि आखिर इस दौरान राखी बांधना क्यों शुभ नहीं माना जाता।

धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन जैसे शुभ पर्व पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाता है। ऐसे में भद्रा काल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की परंपरा है।
क्या होता है भद्रा काल?
हिंदू पंचांग में भद्रा को एक विशेष समय अवधि माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, भद्रा को सूर्य देव और माता छाया की पुत्री तथा शनिदेव की बहन माना जाता है। कहा जाता है कि भद्रा का स्वभाव उग्र है, इसलिए जब इसका प्रभाव पृथ्वी लोक पर होता है तो इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ संस्कारों के अलावा रक्षाबंधन जैसे पर्व पर भी सावधानी रखनी चाहिए।
रक्षाबंधन पर भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधते?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में किए गए शुभ कार्यों का पूरा फल प्राप्त नहीं होता। इसी वजह से रक्षाबंधन पर बहनें भद्रा समाप्त होने के बाद ही भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। ऐसा माना जाता है कि शुभ समय में बांधा गया रक्षा सूत्र भाई के जीवन में सुख, सुरक्षा और समृद्धि लेकर आता है।
रक्षाबंधन 2026 कब मनाया जाएगा?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 9 मिनट से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। हिंदू त्योहारों की गणना आमतौर पर उदया तिथि के आधार पर की जाती है, इसलिए रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।
रावण से जुड़ी है भद्रा काल की कथा
भद्रा काल में राखी न बांधने को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। मान्यता है कि रावण की बहन शूर्पणखा ने उसे भद्रा काल में रक्षा सूत्र बांधा था, जिसके बाद रावण का विनाश हुआ। हालांकि यह कथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और इसे आस्था के रूप में देखा जाता है।
क्या हर भद्रा अशुभ होती है?
ज्योतिष के अनुसार, हर भद्रा को अशुभ नहीं माना जाता। भद्रा का प्रभाव उसके वास स्थान के आधार पर अलग-अलग माना जाता है। जब भद्रा का वास पृथ्वी लोक में होता है, तब शुभ कार्यों से बचने की परंपरा है। वहीं अन्य लोकों में होने पर इसका प्रभाव अलग माना जाता है। इसलिए पंचांग देखकर ही भद्रा का समय निर्धारित किया जाता है।
भद्रा समाप्त होने के बाद ही बांधें राखी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त और भद्रा काल का ध्यान रखना चाहिए। भद्रा समाप्त होने के बाद राखी बांधने से पर्व की पवित्रता और धार्मिक महत्व बना रहता है।