KNEWS DESK- हिंदू धर्म में नृसिंह जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। साल 2026 में यह जयंती और भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी साबित हो सकते हैं।
पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल 2026 को शाम 7:51 बजे शुरू होकर 30 अप्रैल 2026 को रात 9:12 बजे तक रहेगी। हिंदू परंपरा में उदयातिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए इस वर्ष नृसिंह जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी।
इस बार क्यों है इतना खास दिन?
गुरुवार का शुभ संयोग
भगवान नृसिंह, भगवान विष्णु के अवतार हैं। गुरुवार का दिन विष्णु जी की पूजा के लिए समर्पित होता है, ऐसे में इस दिन जयंती पड़ना इसका महत्व और बढ़ा देता है।
रवि योग का निर्माण
इस दिन ‘रवि योग’ का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है। यह योग दोषों का नाश करता है और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है।
नृसिंह जयंती के दिन क्या करें?
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें, संभव हो तो जल में गंगाजल मिलाएं।
- पीले या केसरिया वस्त्र पहनें: यह रंग पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं।
- अभिषेक करें: भगवान नृसिंह की मूर्ति का पंचामृत से अभिषेक करें।
- दान-पुण्य करें: तिल, गुड़ और सत्तू का दान करना लाभकारी माना गया है।
किन बातों से करें परहेज?
- तामसिक भोजन से दूरी: लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा का सेवन न करें।
- विवाद से बचें: इस दिन घर में शांति बनाए रखें।
- चावल का सेवन न करें: कई लोग इस व्रत में चावल से परहेज करते हैं।
- किसी का अनादर न करें: जरूरतमंदों और पशुओं के साथ दया का व्यवहार करें।
धार्मिक महत्व: क्यों मनाई जाती है नृसिंह जयंती?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान नृसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए राक्षस राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। यह घटना सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन पूजा करने से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। साथ ही भक्तों को साहस, आत्मबल और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आस्था और श्रद्धा का पर्व
नृसिंह जयंती सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस खास दिन पर श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाली मानी जाती है।