KNEWS DESK- वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाने वाली परशुराम द्वादशी भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम को समर्पित है। यह तिथि उनकी जयंती के लगभग 9 दिन बाद आती है। जहां जयंती उनके जन्मोत्सव का प्रतीक है, वहीं द्वादशी का दिन साधना, व्रत और विशेष पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में:
- द्वादशी तिथि प्रारंभ: 27 अप्रैल 2026, शाम 06:15 बजे
- द्वादशी तिथि समाप्त: 28 अप्रैल 2026, शाम 06:51 बजे
- उदया तिथि के अनुसार व्रत: 28 अप्रैल 2026, मंगलवार
- पारण का समय: 29 अप्रैल 2026, सुबह 05:42 से 08:21 बजे तक
संतान सुख के लिए क्यों है विशेष?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम को धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर योग्य, संस्कारी और दीर्घायु संतान का आशीर्वाद मिलता है। यह व्रत पितृ दोष, ग्रह बाधा और पूर्व जन्म के नकारात्मक कर्मों से मुक्ति दिलाने वाला भी माना जाता है।
ऐसे करें परशुराम द्वादशी व्रत
इस दिन की पूजा विधि सरल लेकिन प्रभावशाली मानी जाती है:
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर को साफ कर दीपक जलाएं।
- भगवान विष्णु और भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
- विष्णु सहस्त्रनाम या परशुराम स्तोत्र का पाठ करें।
- संभव हो तो व्रत रखें और फलाहार करें।
- पूजा के अंत में संतान सुख और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना करें।
- शाम को पुनः दीप जलाकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
- अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
धार्मिक महत्व और पुण्य फल
परशुराम द्वादशी का महत्व केवल व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धर्म, संयम और सेवा का भी संदेश देती है।
- इस दिन अन्न, वस्त्र और जल का दान करने से कई गुना पुण्य मिलता है।
- यह व्रत जीवन के कष्टों को कम करने और सौभाग्य बढ़ाने वाला माना गया है।
- सच्चे मन से की गई पूजा से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
परशुराम द्वादशी आध्यात्मिक साधना, भक्ति और संतान सुख की कामना का विशेष पर्व है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत न केवल व्यक्तिगत जीवन में सुख-समृद्धि लाता है, बल्कि आत्मिक शांति और संतुलन भी प्रदान करता है।