श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वाराणसी में सुरक्षा और सुविधा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों पर आने वाले लोगों के सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और गंगा नदी में स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सामान की सुरक्षा हमेशा बड़ी चिंता रही है। कपड़े और कीमती सामान कहां सुरक्षित रखें , इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अहम फैसला लिया है। अब मंदिर परिसर और आसपास के घाटों पर डिजिटल लगेज लॉकर लगाए जाएंगे। इन लॉकरों में श्रद्धालु मोबाइल से लेकर सूटकेस तक सुरक्षित रख सकेंगे। खास बात यह है कि इन लॉकरों के उपयोग के लिए डिजिटल पेमेंट की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी। इस पहल से उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बिना किसी चिंता के दर्शन और स्नान का अनुभव देना है, ताकि वे पूरी श्रद्धा और सुविधा के साथ अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।

सुविधा के शुरू होने के बाद लोग अपने कीमती सामान और कपड़े सुरक्षित रूप से जमा कर सकेंगे और बिना किसी चिंता के घाटों पर भ्रमण कर पाएंगे। इसके जरिए श्रद्धालु आसानी से गंगा स्नान कर सकेंगे और काशी विश्वनाथ मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों में दर्शन कर सकेंगे। प्रस्ताव के अनुसार, यह सुविधा जल्द ही दशाश्वमेध घाट और आसपास के क्षेत्रों में भी उपलब्ध कराई जाएगी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि यह कदम पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है, जिससे उनकी यात्रा अधिक सुरक्षित, सहज और व्यवस्थित हो सके।

लगेज लॉकर के प्रमुख स्थान
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए डिजिटल लगेज लॉकर व्यवस्था को कई प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया जाएगा। योजना के तहत दशाश्वमेध प्लाजा, गोदौलिया, टाउन हॉल वाराणसी और बेनियाबाग पार्किंग में ये लॉकर लगाए जाएंगे। कुल 225 डिजिटल लॉकर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन्हें छोटे, मध्यम, बड़े और एक्स्ट्रा लार्ज श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें मोबाइल फोन, छोटे बैग से लेकर बड़े लॉकर में दो सूटकेस तक सुरक्षित रखे जा सकेंगे। इस सुविधा का उद्देश्य सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करना और चोरी या गुम होने की आशंका को खत्म करना है। इससे श्रद्धालु और पर्यटक बिना किसी चिंता के दर्शन और भ्रमण का आनंद ले सकेंगे।