KNEWS DESK- सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और कांवड़िये भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बागपत में भी भगवान शिव का एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो अपनी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक इतिहास के कारण विशेष महत्व रखता है। इसे भगवान परशुरामेश्वर पुरामहादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।
इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि सावन के महीने में यहां स्थापित शिवलिंग अपना रंग बदलता है। इतना ही नहीं, स्थानीय मान्यताओं के अनुसार दुनिया की पहली कांवड़ भी इसी स्थान पर चढ़ाई गई थी। यही वजह है कि सावन में दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु पुरामहादेव मंदिर पहुंचते हैं।
कहां है पुरामहादेव मंदिर?
भगवान परशुरामेश्वर पुरामहादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित है। सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध यह मंदिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर का इतिहास भगवान परशुराम और उनके पिता महर्षि जमदग्नि से जुड़ा बताया जाता है।
सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में कांवड़िये पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मंदिर से जुड़ी प्राचीन मान्यताएं इसे शिव भक्तों के बीच और भी खास बनाती हैं।
भगवान परशुराम से जुड़ी है पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में वर्तमान पुरामहादेव क्षेत्र में कजरी वन हुआ करता था। कहा जाता है कि यहां महर्षि जमदग्नि अपनी पत्नी रेणुका और पुत्र भगवान परशुराम के साथ रहते थे। एक पौराणिक प्रसंग के अनुसार, पिता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान परशुराम ने अपनी माता रेणुका का वध कर दिया था। इस घटना के बाद उन्हें गहरा पश्चाताप हुआ।
मान्यता है कि पश्चाताप और भगवान शिव की कृपा पाने के लिए परशुराम ने इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की और कठोर तपस्या शुरू की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की कृपा से माता रेणुका को दोबारा जीवन मिला और भगवान परशुराम को अजेय फरसा प्रदान किया गया। इसके बाद भगवान परशुराम ने यहां मंदिर का निर्माण कराया। इसी वजह से मंदिर को परशुरामेश्वर पुरामहादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है।
सावन में रंग बदलता है शिवलिंग?
पुरामहादेव मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में यहां स्थापित शिवलिंग का रंग बदलना शामिल है। मंदिर के पुजारियों और स्थानीय श्रद्धालुओं का दावा है कि श्रावण मास के दौरान शिवलिंग के रंग में बदलाव देखने को मिलता है।
श्रद्धालु इसे भगवान शिव का चमत्कार और उनकी विशेष कृपा मानते हैं। हालांकि, यह धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यताओं से जुड़ा दावा है। सावन के दौरान इसी मान्यता के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
यहीं चढ़ाई गई थी दुनिया की पहली कांवड़?
पुरामहादेव मंदिर को कांवड़ यात्रा के इतिहास से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुनिया की पहली कांवड़ इसी स्थान पर भगवान शिव को अर्पित की गई थी।
इसी कारण सावन के दौरान मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। कांवड़िये पवित्र गंगाजल लेकर यहां पहुंचते हैं और भगवान परशुरामेश्वर का जलाभिषेक करते हैं। सावन और फाल्गुन महीने की महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है। दावा किया जाता है कि इन आयोजनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु और कांवड़िये पहुंचते हैं।
सुरक्षा के किए जाते हैं खास इंतजाम
सावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की तरफ से मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं। मंदिर परिसर और प्रमुख रास्तों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है।
इसके अलावा पुलिस बल की तैनाती, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग इंतजाम किए जाते हैं, ताकि कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
मिला ‘सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव’ का सम्मान
पुरामहादेव मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को देखते हुए इस क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से भी विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2024 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने बागपत के पुरा महादेव गांव को उत्तर प्रदेश के ‘सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव’ के सम्मान से नवाजा था।
अब मंदिर को और भव्य स्वरूप देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। पुरामहादेव मंदिर परिसर को काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके तहत ‘पुरा महादेव मंदिर कॉरिडोर’ तैयार किया जाना है। इस परियोजना के लिए करीब 20 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की बात कही गई है।
कॉरिडोर बनने से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक पहुंच और दर्शन की सुविधाएं बेहतर होने की उम्मीद है। सावन के महीने में रंग बदलते शिवलिंग की मान्यता, भगवान परशुराम से जुड़ी पौराणिक कथा और पहली कांवड़ से जुड़ा विश्वास पुरामहादेव मंदिर को शिव भक्तों के लिए बेहद खास बनाता है।