KNEWS DESK- सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु शिवलिंग का अभिषेक कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि शिवलिंग पर सबसे पहले जल चढ़ाना चाहिए, दूध अर्पित करना चाहिए या सीधे पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। शास्त्रों में इसके लिए एक निश्चित क्रम बताया गया है, जिसका पालन करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है।
सबसे पहले करें शुद्ध जल से अभिषेक
शिवपुराण और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर किसी भी सामग्री को अर्पित करने से पहले शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। इसे शिवलिंग का शुद्धिकरण माना जाता है। जिस प्रकार पूजा से पहले स्वयं स्नान कर शरीर को पवित्र किया जाता है, उसी प्रकार भगवान शिव को भी सबसे पहले जल से स्नान कराया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जल अर्पित करने से पूजा की शुरुआत शुभ होती है और इसके बाद चढ़ाई जाने वाली सभी सामग्री विधि-विधान के अनुसार स्वीकार होती है।
जल के बाद करें दूध और पंचामृत से अभिषेक
शुद्ध जल से अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर तैयार किए गए पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। कई भक्त पहले दूध और फिर पंचामृत भी अर्पित करते हैं, जबकि कुछ सीधे पंचामृत से अभिषेक करते हैं। दोनों ही परंपराएं प्रचलित हैं, लेकिन जल से शुद्धिकरण के बाद ही यह क्रम शुरू होता है। पंचामृत को भगवान शिव की प्रिय सामग्री माना गया है। मान्यता है कि इससे अभिषेक करने से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।
पंचामृत के बाद दोबारा जल चढ़ाना क्यों जरूरी है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पंचामृत से अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर एक बार फिर शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करना चाहिए। इससे पंचामृत पूरी तरह धुल जाता है और शिवलिंग पुनः स्वच्छ हो जाता है। यह चरण अभिषेक की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
आखिर में चढ़ाएं बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजन सामग्री
जब अभिषेक की प्रक्रिया पूरी हो जाए, तब शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और तीन पत्तियों वाला साफ-सुथरा बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद धतूरा, आक, सफेद पुष्प, फल, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धा के साथ चढ़ाई जा सकती है। अंत में भगवान शिव के मंत्रों का जाप, आरती और प्रार्थना करें।
शिवलिंग अभिषेक का सही क्रम
- सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें।
- इसके बाद दूध और पंचामृत से स्नान कराएं।
- फिर दोबारा शुद्ध जल अर्पित करें।
- अंत में चंदन, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाकर आरती करें।
शिवलिंग अभिषेक की यह विधि विभिन्न शास्त्रीय परंपराओं में वर्णित क्रम पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा-पद्धति में कुछ अंतर हो सकता है। श्रद्धा और शुद्ध भाव से की गई पूजा को सर्वोपरि माना गया है।