KNEWS DESK- निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से रखने पर सालभर की 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि इस समय इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले सवालों में “निर्जला एकादशी कब है?” शामिल हो गया है। लेकिन इस बार लोगों के बीच सबसे बड़ा कन्फ्यूजन इसकी तारीख को लेकर बना हुआ है — आखिर निर्जला एकादशी मई में है या जून में?
इस साल क्यों बढ़ा कन्फ्यूजन?
आमतौर पर किसी व्रत या त्योहार की तारीख को लेकर भ्रम तब होता है, जब तिथि दो दिनों तक पड़ती है। लेकिन इस बार मामला अलग है। इस बार भ्रम पूरे एक महीने का है और इसकी मुख्य वजह है पुरुषोत्तम मास (अधिक मास)।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ माह के बीच में अधिक मास लग गया है। इसी कारण दो अतिरिक्त एकादशी तिथियां जुड़ गई हैं, जिनकी वजह से निर्जला एकादशी की तारीख आगे खिसक गई।
मई में कौन-सी एकादशी पड़ रही है?
27 मई 2026 को पड़ने वाली एकादशी वास्तव में पद्मिनी एकादशी है, जिसे कमल एकादशी भी कहा जाता है। यह ज्येष्ठ अधिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है।
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 26 मई सुबह 5:10 बजे शुरू होकर 27 मई सुबह 6:21 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई, बुधवार को रखा जाएगा।
निर्जला एकादशी कब है?
अधिक मास के कारण असली निर्जला या भीमसेनी एकादशी अब जून में पड़ेगी। पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन श्रद्धालु निर्जल रहकर भगवान विष्णु की पूजा करेंगे और व्रत रखेंगे।
अधिक मास में पड़ेंगी दो खास एकादशी
इस साल अधिक मास की वजह से दो विशेष एकादशी पड़ रही हैं—
- पद्मिनी एकादशी – 27 मई 2026
- परम एकादशी – 11 जून 2026
इसके बाद 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
पद्मिनी एकादशी का पारण समय
पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण 28 मई को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक रहेगा।
धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें बिना पानी पिए उपवास रखा जाता है। इसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।