वट पूर्णिमा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, पूजा से पहले जान लें क्या करें और क्या न करें और जरूरी नियम

KNEWS DESK- वट पूर्णिमा व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। यह व्रत धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है, जिसे अत्यंत श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जाता है।

वट पूर्णिमा 2026 कब मनाई जाएगी?

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 को सुबह शुरू होकर 30 जून 2026 तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर वट पूर्णिमा व्रत 29 जून 2026, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं बरगद के वृक्ष की पूजा करेंगी और अपने पति की दीर्घायु की कामना करेंगी।

वट पूर्णिमा के दिन क्या करें?

इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ या नए वस्त्र पहनने चाहिए। भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और माता सावित्री का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। बरगद के वृक्ष पर जल अर्पित करें और रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप व फल चढ़ाएं। कच्चा सूत या मौली लेकर वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसे लपेटें। इसके बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। दान-पुण्य और सेवा कार्य भी इस दिन विशेष फलदायी होते हैं।

वट पूर्णिमा के दिन क्या न करें

इस दिन क्रोध, झूठ और विवाद से बचना चाहिए। किसी का अपमान करना अशुभ माना जाता है। पूजा में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और पूरी श्रद्धा के साथ विधि पूरी करनी चाहिए। बरगद के पेड़ की टहनियां या पत्तियां तोड़ने से बचें, क्योंकि इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। साथ ही नकारात्मक विचारों से बचकर परिवार में प्रेम और सम्मान बनाए रखना चाहिए।

वट पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने तप और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। बरगद का वृक्ष दीर्घायु, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है, इसलिए इसकी पूजा का विशेष महत्व है।

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