KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में हॉस्टल और मेस की व्यवस्था को लेकर की गई टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्यपाल के बयान को आधार बनाकर BJP सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने ‘गोरखपुर मॉडल’ और ‘गुजरात मॉडल’ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आपसी टकराव ने BJP की ‘डबल इंजन’ सरकार को ‘ट्रबल इंजन’ में बदल दिया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोरखपुर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए गुजरात का उदाहरण भी सामने आ गया। उन्होंने दोनों राज्यों में BJP की सरकार होने का जिक्र करते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
‘डबल इंजन अब ट्रबल इंजन’- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने राज्यपाल के बयान का वीडियो शेयर करते हुए BJP सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा कि ‘गोरखपुर मॉडल’ की कमियां सामने आने के साथ तुलना के दौरान ‘गुजरात मॉडल’ से जुड़ी गड़बड़ियों की बात भी सामने आई है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि दोनों जगह BJP की सरकार है और भ्रष्टाचार की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आपसी टकराव ने ‘डबल इंजन’ को ‘ट्रबल इंजन’ बना दिया है।
राज्यपाल का बयान गोरखपुर में आने के कारण राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है। गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक क्षेत्र रहा है। मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ यहां से लगातार कई बार लोकसभा सांसद चुने गए थे।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी की व्यवस्थाओं पर राज्यपाल ने उठाए सवाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के हॉस्टल, मेस और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर कई सवाल उठाए। आनंदीबेन पटेल उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि कमियों को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें पहचानकर दूर किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने प्रशासन को तीन महीने के अंदर व्यवस्थाओं में सुधार करने की बात कही। उन्होंने गोरखपुर का जिक्र करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री का क्षेत्र है और अगर यहां भी ऐसी कमियां हैं तो इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
बॉयज हॉस्टल में मेस नहीं होने पर जताई नाराजगी
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के हॉस्टलों की व्यवस्था का जिक्र करते हुए बताया कि परिसर में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि गर्ल्स हॉस्टल में मेस की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन बॉयज हॉस्टल में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है। उन्होंने छात्रों को बाहर से आने वाले टिफिन पर निर्भर रहने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि छात्रों के भोजन की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आनंदीबेन पटेल ने कैंपस में छात्रों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर भी चिंता जताई। उन्होंने खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच कराने के निर्देश दिए।
गुजरात का उदाहरण देने पर शुरू हुई सियासत
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने खाद्य नमूनों की जांच का जिक्र करते हुए गुजरात का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जांच के लिए भेजे जाने वाले नमूनों की विश्वसनीयता सुनिश्चित होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने गुजरात में अपने अनुभव का जिक्र किया और नमूने बदलने जैसी स्थिति की बात कही। राज्यपाल ने कहा कि वह छात्रों के भोजन का मुद्दा केवल राज्यपाल के रूप में नहीं, बल्कि एक मां के नजरिए से उठा रही हैं। उनका कहना था कि बच्चों और छात्रों को अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन मिलना चाहिए। आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को भविष्य में ऐसी शिकायतें सामने न आने देने और हॉस्टल में भोजन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
राज्यपाल की इन्हीं टिप्पणियों को अखिलेश यादव ने राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। उन्होंने इसे BJP सरकार के ‘डबल इंजन’ वाले दावे से जोड़ते हुए हमला बोला है। राज्यपाल का बयान जहां विश्वविद्यालयों में छात्रों की सुविधाओं और भोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला अब उत्तर प्रदेश की सियासत में भी चर्चा का विषय बन गया है।