KNEWS DESK- हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और भक्ति को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया एकादशी व्रत व्यक्ति के जीवन से दुखों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है। 24 एकादशियों में ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अपरा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
वर्ष 2026 में अपरा एकादशी का व्रत 13 मई, बुधवार को रखा गया। अब भक्त 14 मई को विधिपूर्वक व्रत का पारण करेंगे। शास्त्रों के अनुसार, व्रत का संपूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब पारण सही समय और नियमों के अनुसार किया जाए।
अपरा एकादशी पारण का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत का पारण 14 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 31 मिनट से सुबह 8 बजकर 14 मिनट तक शुभ रहेगा। इसी समय के भीतर व्रत खोलना उत्तम माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वादशी तिथि के प्रारंभिक समय को ‘हरिवासर’ कहा जाता है। इस अवधि में व्रत खोलना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए हरिवासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना चाहिए।
कैसे करें अपरा एकादशी व्रत का पारण?
व्रत के पारण वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के दौरान तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। पूजा समाप्त होने के बाद सबसे पहले जल ग्रहण करें या तुलसी का पत्ता खाकर व्रत खोलें। इसके बाद हल्का और सात्विक भोजन करें।
पारण के समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
हरिवासर में न करें पारण
धार्मिक मान्यता के अनुसार हरिवासर के दौरान व्रत खोलना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए सही समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
तामसिक भोजन से करें परहेज
पारण के बाद प्याज, लहसुन, मांस और शराब जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। सात्विक भोजन करना शुभ माना गया है।
द्वादशी पर चावल खाना शुभ
मान्यता है कि द्वादशी तिथि के दिन चावल का सेवन करना शुभ और पुण्यकारी माना जाता है।
दान-पुण्य का महत्व
एकादशी पारण के दिन जरूरतमंद लोगों को दान देना बेहद पुण्यदायी माना गया है। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
अपरा एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत व्यक्ति के पापों का नाश करता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि लाता है। भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। इसलिए इस व्रत को विशेष फलदायी और कल्याणकारी माना गया है।