डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘यादव कुनबा’ हमेशा से ही केंद्र बिंदु रहा है। मुलायम सिंह यादव के बड़े बेटे अखिलेश यादव जहाँ राज्य के मुख्यमंत्री रहे और वर्तमान में विपक्ष का मुख्य चेहरा हैं, वहीं उनके छोटे बेटे प्रतीक यादव हमेशा लाइमलाइट और चुनावी राजनीति से दूर रहे। दशकों से समर्थकों के मन में यह सवाल रहा है कि आखिर प्रतीक यादव ने सक्रिय राजनीति में कदम क्यों नहीं रखा? अब 9 साल पुराना वह बयान और कारण फिर से चर्चा में है, जिसमें प्रतीक ने खुद अपनी खामोशी की वजह बताई थी।
बॉडी बिल्डिंग और बिजनेस को चुना अपना रास्ता
प्रतीक यादव ने राजनीति के बजाय अपने जुनून यानी ‘फिटनेस’ और ‘रियल एस्टेट बिजनेस’ को तरजीह दी। उन्होंने करीब 9 साल पहले एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया था कि उनकी रुचि कभी भी सत्ता की कुर्सी या चुनावी रैलियों में नहीं रही। प्रतीक ने बताया था कि उन्हें बचपन से ही जिम और फिटनेस का शौक था। उन्होंने लखनऊ में एक विश्वस्तरीय जिम भी खोला और अपना ध्यान पूरी तरह से रियल एस्टेट सेक्टर और फिटनेस इंडस्ट्री पर केंद्रित किया। प्रतीक का मानना था कि परिवार में हर किसी का राजनीति में होना जरूरी नहीं है, और वह अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना चाहते थे।
अखिलेश यादव और प्रतीक के बीच का समीकरण
राजनीतिक गलियारों में अक्सर यादव परिवार के भीतर मतभेदों की खबरें आती रही हैं, लेकिन प्रतीक यादव ने हमेशा इन खबरों को सिरे से नकारा है। प्रतीक ने स्पष्ट किया था कि उनके और उनके बड़े भाई अखिलेश यादव के बीच संबंध हमेशा सामान्य रहे हैं। राजनीति से दूर रहने का उनका फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत था, न कि किसी पारिवारिक दबाव का परिणाम। प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव ने हालांकि राजनीति में कदम रखा और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गईं, लेकिन इसके बावजूद प्रतीक ने खुद को चुनावी अखाड़े से बाहर ही रखा।
मुलायम सिंह यादव की इच्छा और प्रतीक का स्टैंड
बताया जाता है कि एक समय पर समर्थकों ने मुलायम सिंह यादव पर इस बात का दबाव बनाया था कि प्रतीक को भी सक्रिय राजनीति में लाया जाए। हालांकि, प्रतीक यादव ने हमेशा अपने पिता की विरासत को राजनीति के बजाय सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा था कि वे अपने पिता का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी खुद की मंजिलें अलग हैं। प्रतीक को अक्सर उनकी महंगी कारों और लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है, जिसे लेकर वे कहते रहे हैं कि वे अपनी मेहनत की कमाई से अपने शौक पूरे करते हैं।