उत्तराखंड डेस्क रिपोट , देवभूमि उत्तराखंड सुंदर पर्वतों वाला राज्य है, लेकिन यह खूबसूरती समय समय पर राज्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. भूस्खलन, बादल फटना, सड़क अवरोध यहाँ आम बात हैं, जिसके कारण विकास और पर्यावरण का संतुलन साधना सरकार के लिए संकट भी बन जाता है.वही अब मानसून भी प्रदेश में दस्तक देने वाला है,साथ ही हर वर्ष चलने वाली चारधाम यात्रा भी अपने चरम पर है.आकड़ो की बात करे तो अब तक 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं,और कई हज़ार श्रद्धालुओं ने आगे के लिए पंजीकरण कराया है,ऐसे में आने वाला समय सरकार के लिए दोहरी चुनौतीयो से भरा हुआ है.लेकिन वही राज्य सरकार मानसून से पहले अलर्ट मोड पर है.आपको बता दे, बीते दिनों मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन की बैठक हो चुकी है.और कई कार्यशालाएं प्रदेश भर में चलाई जा रही है.बीते दिनों हुई बैठकों में मानसून से पहले तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री धामी द्वारा अधिकारियों को निर्देशित किया गया और बैठक के दौरान लोक निर्माण, बी आर ओ, सड़क परिवहन, बिजली, पानी, खाद्य विभाग ने अपनी तैयारियां भी बताई, इसके साथ ही सीएम ने प्रदेशभर की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए हैं. सरकार का दावा है, कि पिछले वर्षों के अनुभव से इस बार तैयारियां बेहतर और पुख्ता हैं. जिसके चलते सत्ता पक्ष इसे सुशासन का मॉडल बता रहा है.लेकिन विपक्ष को ये तैयारियां सिर्फ कागज़ी लग रही हैं. विपक्ष का आरोप है, कि हर साल मानसून से पहले बैठकें और दावे होते हैं, लेकिन समय आते ही धरातल पर सब पोल खुल जाती है. जिसके चलते इस विषय ने राजनीतिक तुल पकड़ लिया है,
उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है और हर वर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटना, सड़कें बाधित होना और नदी-नालों के उफान जैसी घटनाएं सामने आती हैं. ऐसे में मानसून शुरू होने से पहले तैयारियों की समीक्षा और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बेहद जरूरी माना जाता है.उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले सरकार अलर्ट मोड में है। आपदा से निपटने की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन विभाग की बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को मानसून से पहले सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून हमेशा से राज्य के लिए चुनौती रहा है। इसलिए आपदा प्रबंधन में समन्वय के लिए सभी विभागों के साथ बैठक की गई। लोक निर्माण, बीआरओ, सड़क परिवहन, बिजली, पानी और खाद्य विभाग ने अपनी तैयारियां बताईं। किस क्षेत्र में कैसी चुनौती आ सकती है और क्या जरूरत होगी, इस पर चर्चा की गई है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सभी विभागों ने पिछले सालों के अनुभव के आधार पर अच्छी तैयारी की है। सभी से समन्वय बनाकर आपदाओं में काम किया जाएगा ताकि जान-माल का नुकसान रोका जा सके।वही विपक्ष ने धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.साथ ही मानसून और सड़को की बेहाल हालत करने का जिम्मेदार भाजपा सरकार को ही बताया है.
उत्तराखंड में मानसून सीजन से पहले आपदा प्रबंधन विभाग अपनी तैयारियों को और मजबूत करने में जुट गया है. इसी कड़ी में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी यूएसडीएमए की ओर से 11 और 12 जून को दो दिवसीय मानसून प्रिपेयर्डनेस वर्कशॉप आयोजित की जा रही है. इस कार्यशाला में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों और जिलों के अधिकारियों के साथ मानसून के दौरान आने वाली चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. जानकारों का भी मानना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के चलते प्राकृतिक आपदाओं की प्रकृति और तीव्रता में बदलाव देखने को मिल रहा है. ऐसे में केवल पारंपरिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहने के बजाय तकनीक आधारित निगरानी, बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है.वही प्रदेश में मानसून के आने से पहले ही सड़को का बुरा हाल है आए दिन बड़े हादसे देखने को मिल रहे है ऐसे में मानसून की दस्तक और सरकार की तैयारियों के दावों पर कही पानी न फीर जाए.