उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड राज्य में हर वर्ष चलने वाली चारधाम यात्रा का आगाज़ 19 अप्रैल 2026 से एक बार फिर हो गया है. हर वर्ष चलने वाली इस चारधाम यात्रा में लाखों श्रद्धालु देश विदेश से आकर यात्रा को सफल बनाते है. न केवल भक्तो को बल्कि राज्य सरकार को भी इस चारधाम यात्रा का हर वर्ष इंतज़ार रहता है, क्योंकि यात्रा से न केवल श्रद्धालुओं को धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि राज्य की आर्थिकी को बढ़ाने में भी यात्रा की अहम भूमिका रहती आई है. जिसके चलते चारधाम यात्रा को प्रदेश की आर्थिकी में रीड की हड्डी जैसे शब्दों से नवाज़ा जाता है. पिछले वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा में आये श्रद्धालुओं का अलग ही रिकॉर्ड देखने को मिला था, करीब 52 लाख से अधिक भक्तों ने पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में सहभागिता की. वही इस वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा में भी नया रिकॉर्ड बने उसके लिए राज्य सरकार शासन प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट होकर कार्य करता नज़र आ रहा है. आकड़ो की बात करे तो अब तक 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं द्वारा चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण कराया गया है, जो खुद में खास है.अक्षय तृतीया से शुरू हुई इस यात्रा के मात्र एक हफ्ते के भीतर 2.38 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारों धामों में मत्था टेककर पुण्य लाभ कमाया है. वही आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी असुविधा का सामना न करना पड़े उसके लिए राज्य सरकार निरंतर कमर कस्ती दिखाई पड़ रही है. वही प्रदेश की राजनीति में भी चारधाम यात्रा के चर्चे सुर्खियों में है, जहाँ एक ओर सरकार यात्रा को सफल बनाने में पूरी तरह से जद्दोजहद और कई दावे करती नज़र आ रही है, वही विपक्ष को पहले की तरह अभी भी चारधाम यात्रा में असुविधाये नज़र आ रही है. विपक्ष का मानना है कि चारधाम यात्रा के शुरु होने से पहले सरकार कई बैठके करके बड़े बड़े दावे करती नज़र आती है, लेकिन उन सबका कोई खास असर यात्रा के शुरु होने के बाद धारातल पर दिखाई नही देता है, जिसके चलते यात्रा के शुरु होने के बाद प्रशासन की पोल खुलती दिखाई देने लग जाती है. साथ ही शौचालय, पीने का पानी, खाने पीने के सामानों का ऊंचे दामों पर बिकना, हवाई सेवा पंजीकरण के लिए दिक्क़ते, गैस की पूरी तरह से आपूर्ति न हो पाना, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, ट्रैफिक समस्या, बदहाल रास्ते जैसे मुद्दों से विपक्ष सरकार पर हल्ला बोलता नज़र आ रहा है. वही विपक्ष के द्वारा उठाये गये सवालों के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है, जहाँ एक ओर विपक्ष ने यात्रा में असुविधाओं को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी है, तो वही सत्ता पक्ष अपने दावे और सफाई देता नज़र आ रहा है.
प्रदेश में हर वर्ष चलने वाली चारधाम यात्रा की शुरुआत एक बार फिर से हो चुकी है. भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जत्थे यात्रा के दौरान प्रदेश आगमन कर रहे है. शासन प्रशासन द्वारा पूरी जद्दोजहद की जा रही है कि आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा के बीच किसी भी प्रकार की असुविधा ना हो पाए, साथ ही कई बड़े दावे यात्रा के सम्बन्ध में सरकार भी करती नज़र आ रही है. लेकिन सरकार के बड़े बड़े दावो के बीच प्रदेश की राजनीति में विपक्ष यात्रा में व्यवस्थाओं की कमी को मुद्दा बनाकर सरकार पर कई सवाल खड़े करता नज़र आ रहा है. इसी क्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा हरिद्वार में प्रेस वार्ता के दौरान सरकार की चारधाम यात्रा की तैयारियों पर गंभीर आरोप लगाए है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आरोप लगाए है कि सरकार के किये गये सभी इंतज़ाम जमीनी स्तर पर विफल हो रहे है, साथ की बड़ी बड़ी बाते चारधाम यात्रा की सुविधाओं के लिए सरकार ने कही तो है, लेकिन हकीकत उससे बिल्कुल विपरीत नज़र आ रही है. विपक्ष का मानना है कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की पहचान है, लेकिन सरकार इसकी गरिमा बनाये रखने में नाकाम साबित हो रही है, जिसके चलते सरकार को व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की ओर धरातल पर कार्य करने की जरुरत है अन्यथा इससे गलत संदेश जाता हुआ दिखाई पड़ सकता है.
चारधाम यात्रा में असुविधाओं को मुद्दा बनाकर इस बार विपक्ष सरकार को घेरता नज़र आ रहा है, जिसके चलते प्रदेश की राजनीति में आपसी बयानबाज़िया देखने को भी मिलने लगी है. जहाँ एक ओर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है, वही सत्ता पक्ष विपक्ष की चिंता और सवालों को महज राजनीति करार कर रहा है. सत्ता पक्ष का मानना है कि चारधाम यात्रा को नकारात्मक रुप से पेश नही किया जाना चाहिए, अन्यथा इसका प्रभाव आने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है, जिसके कारण इस सबका असर प्रदेश की आर्थिकी में दिखाई दे सकता है. सत्ता पक्ष का कहना है कि चार धाम में आने वाले भक्त व श्रद्धालु हर्षोल्लास के साथ यात्रा का आनंद ले सके उस ओर सरकार बेहतर से बेहतर कार्य कर रही है, लेकिन विपक्ष लगातार भ्रम की राजनीति करते हुए यात्रा की छवि को दूषित करने का काम कर रहा है, बेहतर यही है कि यदि वाकई में किसी प्रकार की कोई असुविधा है तो उस विषय को किसी भी रूप में सरकार तक पहुंचाना जाना चाहिए, लेकिन विपक्ष की मंशा केवल राजनीति करने की दिशा में ही काम करने की रहती है.
चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह राज्य की प्रशासनिक क्षमता की भी परीक्षा बन चुका है. हर साल श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में व्यवस्थाओं को और अधिक आधुनिक और मजबूत बनाने की जरूरत है. सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इतनी बड़ी संख्या को संभालना आसान नहीं है. लेकिन यह भी सच है कि बेहतर योजना और प्रबंधन से हालात को काफी हद तक सुधारा जा सकता है.