घोषणाओं का बाजार फिर भी कई नाराज !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड राज्य में वर्तमान में चल रही धामी सरकार के चार वर्षों से अधिक समय का कार्यकाल पूरा हो चुका है. बीते दिनों देखा गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में चल रही धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर राज्यभर में विभिन्न बड़े कार्यक्रम आयोजित किये गये साथ ही केंद्रीय मंत्रियों ने इन कार्यक्रमों में उपस्तिथि देकर धामी सरकार की तारीफों में चार चांद लगाने का काम किया. सत्ता दल द्वारा भी इन चार सालों को चार साल बेमिसाल का नारा दिया गया. नारा बनता भी है, क्योकि इन चार वर्षों के कार्यकाल में अनेकों ऐतिहासिक निर्णय और अनेको ऐसे कार्य मुख्यमंत्री धामी द्वारा किये भी गये जिनकी सरहाना न केवल प्रदेश में बल्कि पूरे देश और विदेशों में भी चर्चित हुए है.आपको बता दे, कि प्रदेश में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव भी होने जा रहे है, जिसके चलते कुछ महीनों का समय ही धामी सरकार के पास कार्य करने का रह गया है, इस दौरान धामी सरकार के साथ पूरा शासन प्रशासन अपनी कमर कस्ते हुए अनेकों योजनाओं और घोषणाओं पर कार्य करते नज़र आ रहे है. मुख्यमंत्री धामी द्वारा सभी विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाकर और पारदर्शिता के साथ कार्य करने के लिए निर्देश भी दिये गये है, जिसके चलते धामी सरकार नो पेंडेंसी को मूल मंत्र बनाकर कार्य करती दिखाई दे रही है. वही मुख्यमंत्री धामी का भी मत है कि देश व प्रदेश की जनता के हित में किसी भी विभागीय कार्य के दौरान कोई लापरवाही न होने पाए और हर संबंधित कार्य का निवारण तय सीमा के भीतर किया जाये. आपको बता दे मुख्यमंत्री धामी ने अपने कार्यकाल जुलाई 2021 से अब तक के दौरान कुल 3,980 घोषणाएं की हैं, जिनमें से सरकार के अनुसार से 70% से अधिक को पूरा भी कर लिया गया है. लेकिन जहाँ एक ओर सत्ता दल मुख्यमंत्री धामी के निर्णय, घोषणाओं और कार्यों को लेकर खुश दिखाई दे रहा है, वही विपक्ष अभी भी धामी सरकार के कार्यों और घोषणाओं पर कई सवाल खड़े करता दिखाई पड़ रहा है. विपक्ष का मानना है कि पूरी हुई घोषणाएं मात्र कागज़ो तक ही सीमित है, धरातल पर कोई कार्य नही हो पा रहा है. और केवल हवा हवाई बाते सरकार करती दिखाई दे रही है. इसी बीच विपक्ष के साथ साथ अधिकारियों की नाकामी के चलते खुद सत्ताधारी सरकार के मंत्री भी हैरत में दिखाई दे रहे है, हालिया मुद्दा सरकारी आवास मिलने पर हो रही देरी के चलते कैबिनेट मंत्री नाराज़गी ज़ाहिर करते दिखाई दिये है, साथ ही अधिकारियों पर लापरवाही व अपने कार्यों के प्रति सजग न होने जैसे आरोप भी लगाते नज़र आ रहे है. वही इस विषय को भी विपक्ष द्वारा राजनितिक मुद्दा बना लिया गया है जिसके चलते विपक्ष सरकार के कार्यों में ढीलाई और कैबिनेट मंत्री को सरकारी आवास मिलने पर होने वाली देरी को लेकर चुटकी लेता भी नज़र आ रहा है.

प्रदेश की सियासत में धामी सरकार के चार वर्षों से अधिक कार्यकाल का समय पूरा होने जा रहा है. इन चार वर्षों में कई घोषणाएं और अनेको ऐतिहासिक निर्णय मुख्यमंत्री धामी द्वारा लिए गये है, जिसकी प्रशंसा देश विदेशों में भी हुई है. मुख्यमंत्री धामी का मानना है कि सरकार द्वारा की गई घोषणाओं को समय रहते पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है, जिसके लिए मुख्यमंत्री धामी स्वयं लगातार समीक्षा बैठकों के जरिये घोषणाओं और बचे हुए कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित भी कर रहे है. मुख्यमंत्री धामी का मानना है. कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जन-हित है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी. सत्ता पक्ष का भी मानना है कि मुख्यमंत्री धामी प्रदेश हित में बेहतरी के साथ कार्य कर रहे है. और अब तक की उनके द्वारा की गई घोषणाओं में से 70 से 80 प्रतिशत पूरी भी कर ली गई है. साथ ही बचे हुए कार्यों को शुरू करने का प्रयास भी किया जा रहा है. लेकिन प्रदेश की राजनीति में विपक्ष अभी भी धामी सरकार की घोषणाओं पर सवाल खड़े कर रहा है. और सरकार के दावो को हवाहवाई बताते हुए महज़ कागज़ी बताता नज़र आ रहा है।

एक ओर धामी सरकार द्वारा अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है, और मुख्यमंत्री धामी द्वारा नो पेंडेंसी को मूल मंत्र बना कार्यों को करने के लिए आदेश दिया गया है, वही विपक्ष के साथ अब सत्ताधारी सरकार के ही मंत्री अधिकारियों की लापरवाही से दुखी नज़र आ रहे है. आपको बतादे कि हालही में बने सामाजिक, अल्पसंख्यक, भाषा और छात्र कल्याण विभाग के कैबिनेट मंत्री खजान दास द्वारा सरकारी आवास मिलने पर हो रही देरी पर नाराज़गी ज़ाहिर की गई है. उनके अनुसार सरकारी आवास को लेकर अधिकारी लापरवाही करते दिखाई दे रहे है. जिससे मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी कार्यों में हो रही ढिलाई का प्रमाण दिखाई दे रहा है. खजान दास ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उनकी आवेदन फाइल को कहीं गुम कर दिया गया है. जिसका अधिकारीयों को ही कुछ मालूम नही है और अनुरोध करने के बाद भी अभी तक सरकारी आवास उनको नही मिल पा रहा है,मंत्री ने जताया है की  यदि समय रहते अधिकारियों की लापरवाही खत्म नही हुई तो वह इस विषय का संज्ञान  खुद मुख्यमंत्री धामी के आगे रखते नज़र आएंगे. वही इस मामले ने विपक्ष को भी सत्ताधारी सरकार को घेरने का मुद्दा दे दिया है, विपक्ष का मानना है कि वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर हर जगह प्रश्नचिन्ह है, और रही बात कैबिनेट आवास की तो किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा उक्त आवास को पाने के लिए दिलचस्पी दिखाई गई है.वही अधिकारियों ने कैबिनेट मंत्री की फाइल गुम करने का बहाना बना डाला है. विपक्ष पूरे मामले पर चुटकी लेता नज़र आ रहा है और सत्ता दल अपनी सफाई पेश करता दिखाई पड़ रहा है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार के पास अब कुछ ही महीने बचे हैं. ऐसे में घोषणाओं को धरातल पर उतारना और अंदरूनी असंतोष को थामना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है. विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी में है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब कैसे देती है, साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बावजूद वह कौन से अधिकारी है जो कार्यों में ढिलाई बरत रहे हैं अन्यथा इससे कही न कही एक गलत संदेश भी प्रदेश के बीच जाता हुआ नज़र आ सकता है।

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